Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 21 Mar, 2026 08:55 PM

केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक तरफ लंबे समय से फरार बैंक धोखाधड़ी के आरोपी को गिरफ्तार किया है,
नेशनल डेस्क: केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक तरफ लंबे समय से फरार बैंक धोखाधड़ी के आरोपी को गिरफ्तार किया है, तो दूसरी ओर एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में अदालत से दोषियों को सजा दिलाई है।
9 साल से फरार आरोपी आखिरकार गिरफ्तार
दिल्ली के शाहदरा इलाके से CBI ने बैंक फ्रॉड केस के मुख्य आरोपी विपिन राठी को दबोच लिया है, जो पिछले 9 साल से फरार चल रहा था। यह मामला Punjab National Bank (PNB) की नजफगढ़ शाखा से जुड़ा है, जहां 2015 में करीब ₹4.11 करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ था। जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके साथियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक को नुकसान पहुंचाया।
2017 में कोर्ट ने आरोपी को भगोड़ा घोषित किया। लंबे समय तक पहचान छिपाकर रह रहा था। हाल ही में गुप्त सूचना के आधार पर ट्रेस किया गया। CBI ने तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की मदद से 19 मार्च 2026 को उसे उसके काम करने की जगह से गिरफ्तार कर लिया।
छुपकर नौकरी कर रहा था आरोपी
जानकारी के अनुसार, आरोपी दिल्ली के शाहदरा इलाके में किराए के मकान में रह रहा था और अपनी पहचान बदलकर एक पार्किंग स्थल पर काम कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
देहरादून में PWD घोटाले पर बड़ा फैसला
दूसरे मामले में CBI की विशेष अदालत, Dehradun ने 55 लाख रुपये के पुराने घोटाले में बड़ा फैसला सुनाया है।
- 8 सरकारी कर्मचारियों को दोषी करार
- प्रत्येक को 2 साल की सश्रम कारावास
- कुल ₹2.85 लाख का जुर्माना
20 साल पुराने घोटाले का खुलासा
यह मामला 2001-02 का है, जब हरिद्वार PWD में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्जी चेक के जरिए सरकारी खजाने से पैसा निकाला था। Uttarakhand High Court के निर्देश पर CBI ने 2003 में जांच शुरू की। 2005 में 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल। कई आरोपियों को पहले ही सजा या राहत मिल चुकी थी। अब शेष 8 दोषियों को अदालत ने सजा सुनाई है।
CBI की कार्रवाई से साफ संदेश
इन दोनों मामलों से यह साफ होता है कि कानून से बच पाना आसान नहीं है। चाहे आरोपी वर्षों तक फरार रहे या मामला कितना ही पुराना क्यों न हो, जांच एजेंसियां आखिरकार कार्रवाई तक पहुंचती हैं।