Edited By Radhika,Updated: 21 Mar, 2026 12:14 PM

दुनियाभर में मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर हो रहा है। इस युद्ध के चलते सबसे बड़ा असर ईंधन पर हुआ है,जिससे कई जगहों पर ईंधन में किल्लत देखी जा रहीहै। ऐसे में भारत सरकार ने लोगों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय सरकार ने अमेरिका से 1 लाख 76...
LPG Crisis: दुनियाभर में मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर हो रहा है। इस युद्ध के चलते सबसे बड़ा असर ईंधन पर हुआ है,जिससे कई जगहों पर ईंधन में किल्लत देखी जा रहीहै। ऐसे में भारत सरकार ने लोगों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय सरकार ने अमेरिका से 1 लाख 76 हजार टन एलपीजी खरीदी है। एसएंडपी कमोडिटीज एट सी (CAS) के आंकड़ों के मुताबिक, 19 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में आयात गिरकर 2,65,000 टन रह गया है, जो मार्च की शुरुआत में 3,22,000 टन था।
खाड़ी देशों से सप्लाई हुई 'आधी'
इस बीच हैरान करने वाली बात यहा है कि पश्चिम एशिया से होने वाला प्रवाह घटकर महज 89,000 टन रह गया है। यह जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर पर है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा पारंपरिक रूप से खाड़ी देशों से आता था, लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है।

अब 'मेड इन USA' गैस से जलेगा भारत का चूल्हा?
खाड़ी देशों में आई कमी की भरपाई के लिए भारत ने अमेरिका की ओर रुख किया है।19 मार्च वाले सप्ताह में वैकल्पिक क्षेत्रीय आपूर्ति बढ़कर 1,76,000 टन हो गई, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका का है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय तेल कंपनियां साल 2026 में अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी आयात कर सकती हैं। पहली बार अमेरिकी एलपीजी लोडिंग की मात्रा पारंपरिक खाड़ी देशों (Gulf Suppliers) से अधिक हो गई है।
क्या फिर बढ़ेंगे दाम?
भले ही भारत ने रूस और अमेरिका जैसे विकल्प तलाश लिए हैं, लेकिन लंबी दूरी के कारण ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ सकती है। मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिका से कुछ जहाज भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन लंबी दूरी की सप्लाई के कारण आने वाले हफ्तों में स्टॉक मैनेजमेंट एक बड़ी चुनौती होगा।