'गड़बड़ी हुई है तो सभी परीक्षाएं रद्द करें', CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व OSD की गिरफ्तारी के बाद बोले भूपेश बघेल

Edited By Updated: 16 Sep, 2026 10:46 AM

bhupesh baghel demands strict action after ex osd s arrest in cgpsc paper leak

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने बुधवार को उन प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की जिनमें गड़बड़ियां हुई हैं। यह मांग तब की गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पेपर लीक घोटाले के...

रायपुर (छत्तीसगढ़) : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने बुधवार को उन प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की जिनमें गड़बड़ियां हुई हैं। यह मांग तब की गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पेपर लीक घोटाले के सिलसिले में उनके पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) को गिरफ्तार किया। केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच करने और परीक्षा प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों को तुरंत रोकने का आग्रह किया। 

बघेल ने पत्रकारों से कहा, 'इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार क्या कर रही है? सभी परीक्षाएं रद्द की जानी चाहिए। वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं? अगर कोई गड़बड़ी हुई है, तो उन्हें इसे रद्द कर देना चाहिए।' उन्होंने अधिकारियों से निर्णायक कदम उठाने की मांग करते हुए कहा, 'सरकार को इसकी गहन जांच करनी चाहिए और गड़बड़ियों को रोकना चाहिए।' 

मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने गांधी के मशहूर नारे पर तंज कसते हुए पार्टी पर कई राज्यों में नौकरी चाहने वाले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। स्वराज ने मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व पर उन राज्यों में भर्ती में कथित गड़बड़ियों और प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर निशाना साधा, जहां पार्टी की सरकार है या रही है। 

बांसुरी स्वराज ने कहा, 'ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी की तथाकथित 'मोहब्बत की दुकान' सिर्फ भ्रष्टाचार का कारोबार करती है। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं कि एक तरफ तो वे छात्रों की बात करते हैं, लेकिन जब उनकी ही पार्टी के सदस्य देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, तो क्या यह आवाज उन तक नहीं पहुंचती?' 

स्वराज ने विपक्षी पार्टी के भीतर व्यवस्थित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए तीन खास मामलों का जिक्र किया जिसमें उत्तराखंड VPDO परीक्षा घोटाला, छत्तीसगढ़ CGPSC पेपर लीक और हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स भर्ती का मामला शामिल है। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के PA KK चंद्राकर के भतीजे उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया। उस पर आरोप है कि उसने नौकरी के उम्मीदवारों से CGPSC-2021 परीक्षा के लीक हुए प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर 3 करोड़ रुपए नकद जमा किए थे। 

ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने 1 सितंबर को उत्कर्ष को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पांच जगहों पर तलाशी अभियान के बाद 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के तहत की गई। यह कार्रवाई CGPSC द्वारा 2020 और 2021 में आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, प्रश्न-पत्र लीक और भ्रष्टाचार के मामले में की गई थी। 

अपनी जांच के आधार पर जारी एक बयान में ED ने कहा कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 परीक्षा के लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के उम्मीदवारों से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद जमा किए थे। इसमें से 2.80 करोड़ रुपए अनिल चंद्राकर को दिए गए थे। ED ने कहा कि उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे पैसे जमा करने के लिए KK चंद्रवंशी (जो उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पर्सनल असिस्टेंट और उसके मामा थे) और मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया था। 

ED की जांच रायपुर में इकोनॉमिक ऑफेस विंग, एंटी-करप्शन ब्रांच और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज दो FIR के आधार पर शुरू की गई थी। ये FIR CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी और अन्य लोगों के खिलाफ 2020-2021 के दौरान आयोजित CGPSC स्टेट सर्विस परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दर्ज की गई थीं। 

ED ने आगे कहा कि जांच से पता चला है कि CGPSC परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र निजी दलालों के जरिए आरोपी व्यक्तियों के रिश्तेदारों और चुने हुए उम्मीदवारों को गैर-कानूनी फ़ायदे के बदले लीक किए गए थे। इस तरह डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) जैसे सीनियर सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन सुनिश्चित किया गया था। इस मामले में इस साल 3 जून को की गई तलाशी और इकट्ठा किए गए सबूतों, PMLA, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, उनके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों और उनके बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण के आधार पर यह साबित हुआ कि उत्कर्ष चंद्राकर जानबूझकर अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में शामिल थे, जिसमें इसे पैदा करना, हासिल करना, अपने पास रखना, छिपाना और लेयरिंग (पैसे को इधर-उधर घुमाकर स्रोत छिपाना) शामिल है। 

ED ने कहा, 'इसे बिना किसी दाग-धब्बे वाली संपत्ति के तौर पर ट्रांसफर, इस्तेमाल और पेश किया गया।' इसके मुताबिक एजेंसी ने बताया कि उसने PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत 1 सितंबर, 2026 को उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया। एजेंसी ने आगे कहा कि 1 सितंबर को चलाए गए सर्च ऑपरेशन में जांच से जुड़े अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, फाइनेंशियल रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात और दूसरे सबूत जब्त किए गए। 

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