ब्राजील में 1975 से हो रहा बायो एथेनॉल फ्यूल का इस्तेमाल,वाहनों की क्षमता को खतरा नहीं: नितिन गडकरी

Edited By Updated: 14 Jun, 2026 02:27 PM

bioethanol fuel has been used in brazil since 1975 vehicle efficiency is not at

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि पैट्रोल में एथेनॉल को मिलाने से किसी भी वाहन की क्षमता को कोई खतरा नहीं है और एथेनॉल के खिलाफ यह मुहिम पैट्रोलियम पदार्थों का आयात करने वाली उस लाबी द्वारा चलाई जा रही है जिसे पैट्रोल में...

नेशनल डेस्क: केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि पैट्रोल में एथेनॉल को मिलाने से किसी भी वाहन की क्षमता को कोई खतरा नहीं है और एथेनॉल के खिलाफ यह मुहिम पैट्रोलियम पदार्थों का आयात करने वाली उस लाबी द्वारा चलाई जा रही है जिसे पैट्रोल में एथेनॉल मिलाने से 24000 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ है। पंजाब केसरी के साथ विशेष बातचीत के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि वह खुद 100 प्रतिशत बायो एथेनॉल वाली कार का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी कार को इस से कोई नुकसान नहीं हुआ बल्कि इस ईंधन के प्रयोग से वह पर्यावरण को भी सुरक्षित कर रहे हैं।

देश को 24000 करोड़ की विदेशी मुद्रा का नुक्सान 
नितिन गडकरी ने कहा कि पैट्रोल में एथेनॉल की ब्लैंडिंग करने से एक वित्तीय वर्ष में करीब 24000 करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और यदि इस पैसे से कच्चे तेल का आयात किया जाता तो देश को 24000 करोड़ की विदेशी मुद्रा का नुक्सान होता लिहाजा यही कंपनियां अब एथेनॉल के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रही हैं। गडकरी ने कहा कि ऐसा प्रचार करने वाले यह भी कह रहे हैं कि नितिन गडकरी की कंपनी खुद एथेनॉल बनाती है इसलिए इसका इस्तेमाल पैट्रोल में किया जा रहा है लेकिन तथ्य यह है कि देश में 500 से ज्यादा कंपनियां एथेनॉल के निर्माण में जुटी हैं और उनकी कंपनी का नंबर 350 के बाद आता है।

पैट्रोल में एथेनॉल से किसानों को फायदा 
गडकरी ने कहा कि उनकी कंपनी पैट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल शुरू होने से पहले ही एथेनॉल का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि पैट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल होने के बाद उत्तर प्रदेश में मक्की की कीमत 1200 से बढ़ कर 2800 रुपए पहुंच गई थी और इससे उत्तर प्रदेश के किसानों को फायदा हुआ और देश का पैसा बाहर जाने के बजाय देश के किसान के पास गया और अर्थव्यवस्था का हिस्सा बना। यह बात इस लॉबी को हजम नहीं हो रही है और यह लॉबी इसी कारण इस प्रकार का दुष्प्रचार कर रही है। एथेनॉल के निर्माण के लिए गन्ने, मक्के के अलावा बचे हुए चावल का इस्तेमाल होता है और यह तीनों फसलें किसान ही पैदा करता है लिहाजा एथेनॉल काइस्तेमाल बढ़ने से जहां एक तरफ देश के किसान को फायदा होगा वहीं दूसरी तरफ देश की विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

ब्राजील में 1970 से एथेनॉल का कर रहा है प्रयोग 
उन्होंने कहा कि ब्राजील में 1970 के दशक से पैट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा हे और ब्राजील में इसके सफलतापूर्वक इस्तेमाल के लिए बाकायदा एक अलग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है और इस से किसानों की आय भी बढ़ी है और ईंधन की वैकल्पिक व्यवस्था होने के कारण ईंधन के संकट से भी नहीं जूझना पड़ता।

कार 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकती है
गौरतलब है कि आजकल सोशल मीडिया पर एथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर एक मुहिम चलाई जा रही है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल के मिश्रण वाले पैट्रोल से वाहन के इंजन की क्षमता प्रभावित होती है और इसके साथ ही इस पैट्रोल को इस्तेमाल करने से वाहन की एवरेज भी कम मिलती है। नितिन गडकरी ने कहा कि पैट्रोल और एथेनॉल की एनर्जी क्षमता में हल्का अंतर होता है और लंबे रूट पर एथेनॉल वाले पैट्रोल का इस्तेमाल करने पर निश्चित तौर पर वाहन की एवरेज 5 प्रतिशत तक कम हो सकती लेकिन यदि आप वाहन को शहर चलाते हैं तो 100 पर्तिशत पैट्रोल और एथेनॉल मिश्रित पैट्रोल की एवरेज में कोई अंतर नहीं निकलता और यह बात रिसर्च में भी सामने आ चुकी है। गडकरी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी ने हाल ही में वैगेनार फ्लैक्स फ्यूल कार को लांच किया है। यह कार 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकती है। क्या जापान की कंपनी सरकार के कहने पर ही इतना बड़ा कदम उठा लेगी। कई वर्ष की रिसर्च के बाद ही कंपनी ने यह कार लांच की है। यह कार हायर एथेनॉल ब्लैंडिंग पर भी आसानी से चल सकती है।

कुल प्रदूषण का 40 प्रतिशत प्रदूषण
नितिन गडकरी ने कहा कि देश में होने वाले कुल प्रदूषण का 40 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों से होता है और देश में क्लीन एनर्जी वाले वाहनों और इलैक्ट्रिक वाहनों की जरूरत है और आने वाले समय में इस तरह के वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल और ज्यादा बढ़ेगा। पैट्रोलियम मंत्रालय जल्द ही देश में ई-85 ईंधन को लांच करने की तैयारी कर रहा है इसकी कीमत मौजूदा ई-20 ईंधन के मुकाबले काफी कम होगी।

12 वर्ष में रोड नैटवर्क सुधरने से यात्रा आसान हुई
नितिन गडकरी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान देश के सड़क नैटवर्क में ऐतिहासिक प्रगति हुई है और सड़कों का जाल बिछने से न सिर्फ आम नागरिक के लिए यात्रा सुगम और सुरक्षित हो रही है बल्कि इस से अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। 2014 में देश में राष्ट्रीय राजमार्ग नैटवर्क का रिकॉर्ड विस्तार 91,287 किलोमीटर था जो अब बढ़ कर 1,46,572 किलोमीटर हो गया है।

धार्मिक स्थानों पर रोप-वे का विस्तार किया
इसी प्रकार पिछले 12 सालों में हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा और पर्यटन को नई गति मिली है और इन कॉरिडोर्स की लंबाई 93 किलोमीटर से बढ़ कर 3644 किलोमीटर हो गई है। 4-लेन और उससे चौड़ी सड़कों का भी विस्तार हुआ है और इस से यात्रा अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित हुई है। देश में 4 लेन सड़कें अब 18,371 किलोमीटर से बढ़ कर 45,516 किलोमीटर हो गई हैं। इसके अलावा देश भर के बड़े धार्मिक स्थानों पर रोप-वे का विस्तार किया जा रहा है।

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि: गडकरी
नितिन गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर बालटाल और मिनमर्ग के बीच बन रही लगभग 14 किलोमीटर लंबी दोनों ट्रैफ्बेस आने जाने वाली जोजिला सुरंग भारत की सबसे महत्वाकांक्षी पर्वतीय अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। इसे लगभग 6800 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है।

2900 मीटर से 3310 मीटर की ऊंचाई पर निर्मित यह परियोजना दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण भूभागों में से एक में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करती है। भारी हिमपात, प्रतिकूल मौसम और जटिल भूवैज्ञानिक चुनौतियों के बावजूद, इंजीनियरों, श्रमिकों, सलाहकारों, ठेकेदारों, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एन.एच.आई.डी.सी.एल.) और अन्य हितधारकों के प्रयासों से परियोजना में निरंतर प्रगति हुई है।
 

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