प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र तैयार, सीएम योगी 3 जुलाई को करेंगे लोकार्पण

Edited By Updated: 02 Jul, 2026 11:45 PM

state of the art training center ready to enhance administrative capacity

उत्तर प्रदेश में सुशासन को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह तथा भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में योगी सरकार शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धि जोड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 जुलाई को डॉ. राम मनोहर लोहिया...

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश में सुशासन को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह तथा भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में योगी सरकार शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धि जोड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 जुलाई को डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करेंगे। 

लगभग ₹464 करोड़ से अधिक की लागत से 22.5 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित यह परिसर प्रदेश की सात दशक से अधिक पुरानी प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक अधोसंरचना, उन्नत तकनीक और वैश्विक प्रशिक्षण मानकों से जोड़ते हुए नई दिशा देगा। आईएएस, पीसीएस समेत विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा नेतृत्व विकास का यह केंद्र भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

75 वर्षों की प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा आधुनिक स्वरूप

उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 1951 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल (ओटीएस) से हुई थी। पिछले सात दशकों से अधिक समय में इस संस्थान ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस), न्यायिक सेवा, राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित ग्रुप 'ए' एवं ग्रुप 'बी' अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय में शासन की चुनौतियों और प्रशासनिक दायित्वों के विस्तार को देखते हुए इस ऐतिहासिक संस्था को अत्याधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना से सशक्त किया गया है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक नेतृत्व तैयार किया जा सके।

प्रशिक्षण और प्रशासनिक उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा नया परिसर

नई प्रशिक्षण अधोसंरचना का उद्देश्य अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य-संस्कृति को अधिक दक्ष, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाना है। यहां आईएएस, पीसीएस, न्यायिक सेवा, राज्य सेवाओं तथा विभिन्न विभागों में चयनित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के फाउंडेशन, इंडक्शन और मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही नेतृत्व विकास, नीति क्रियान्वयन, डिजिटल गवर्नेंस, परियोजना प्रबंधन, नवाचार, आपदा प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन और जनसेवा जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बदलती प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों की निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को नई मजबूती मिलेगी।

प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को मिलेगी नई ऊर्जा

यह परिसर केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी के सतत क्षमता निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा। राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारियों के अलावा विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पुनर्प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और विषय-विशेष प्रशिक्षण की भी यहां व्यापक व्यवस्था होगी। मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण, सतत अधिगम और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को भी इससे नई गति मिलेगी। इससे शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र तैयार करने में सहायता मिलेगी।

विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर

नवीन परिसर में एक साथ 300 आवासीय तथा 900 गैर-आवासीय, यानी कुल 1,200 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की गई है। परिसर में 13 अत्याधुनिक प्रशिक्षण कक्ष, 300 सीटों का प्रेक्षागृह, दो बहुउद्देशीय हॉल, 300 क्षमता का छात्रावास, डिजिटल लर्निंग सेंटर, डिजिटल स्टूडियो, डिजिटल लैब, आधुनिक पुस्तकालय, कॉन्फ्रेंस रूम, बोर्ड रूम, शोध एवं अध्ययन सुविधाएं, क्रिकेट मैदान, बैडमिंटन कोर्ट तथा लॉन टेनिस कोर्ट जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की भी सुविधा होगी।

सुशासन को मिलेगा स्थायी संस्थागत आधार

उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका भी लगातार विस्तृत हुई है। ऐसे में आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था समय की आवश्यकता बन गई थी। नया परिसर अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलती प्रशासनिक अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने के साथ नीति क्रियान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को और अधिक सुदृढ़ करेगा। प्रशासनिक क्षमता निर्माण को संस्थागत मजबूती देने की दिशा में यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सुशासन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

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