Edited By Radhika,Updated: 25 Jun, 2026 11:17 AM

साल 1975 में देश में आज ही के दिन इमरजेंसी लागू की गई थी। पीएम मोदी ने गुरुवार को 1975 की इमरजेंसी को संविधान पर सीधा हमला बताया और उस दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वालों को श्रद्धांजलि दी। इमरजेंसी लागू होने की बरसी पर 'X' (पहले ट्विटर)...
नेशनल डेस्क: साल 1975 में देश में आज ही के दिन इमरजेंसी लागू की गई थी। पीएम मोदी ने गुरुवार को 1975 की इमरजेंसी को संविधान पर सीधा हमला बताया और उस दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वालों को श्रद्धांजलि दी। इमरजेंसी लागू होने की बरसी पर 'X' (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में, PM मोदी ने नागरिक अधिकारों के निलंबन और कड़े 'मेंटेनेंस ऑफ़ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट' (MISA) के तहत राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी को याद किया।
PM ने पोस्ट शेयर कर लिखा-
उन्होंने लिखा, "आज हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक - इमरजेंसी - के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से रक्षा की। इमरजेंसी हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इसमें नागरिक अधिकारों का निलंबन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और समाज सेवियों की गिरफ्तारी और उन संस्थानों पर हमला देखा गया जो हमारे लोकतंत्र की नींव हैं।" उन्होंने आगे कहा, "साथ ही, इसने अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी दिखाया, जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और हमारे संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।" प्रधानमंत्री ने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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"हम सभी के लिए, हमारा संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।" पोस्ट में लिखा था, "हमारे संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा।"
25 जून 1975 को, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने "आंतरिक अशांति" का हवाला देते हुए अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की थी। भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच आपातकाल लागू रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उस दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित करने और कड़े 'मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट' (MISA) के तहत जयप्रकाश नारायण सहित विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए काफी आलोचना की जाती है। जेपी नारायण ने 1970 के दशक में कांग्रेस सरकार के खिलाफ 'संपूर्ण क्रांति' (बिहार आंदोलन) का नेतृत्व किया था।
शाह आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया गया, नसबंदी अभियान चलाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई। बीजेपी ने पिछले साल आपातकाल की 50वीं बरसी को "संविधान हत्या दिवस" के तौर पर मनाया था।