Edited By Radhika,Updated: 24 Mar, 2026 03:13 PM

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को भाजपा नेताओं ने राज्य में "वित्तीय कुप्रबंधन" का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। भाजपा ने अब हिमाचल में...
नेशनल डेस्क: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ BJP ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को भाजपा नेताओं ने राज्य में वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। भाजपा ने अब हिमाचल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग उठा दी है।
जनता पर टैक्स का बोझ
भाजपा राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने राज्य सरकार पर तीखे हमले किए। महाजन ने दावा किया कि हालिया बजट राज्य की बदहाल माली हालत का सबूत है। उन्होंने इसे वित्तीय आपातकाल करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पेट्रोल और डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाकर जनता की कमर तोड़ रही है। "कांग्रेस कुछ भी संभालने में असमर्थ है, हम राष्ट्रपति शासन की मांग करेंगे,"महाजन ने कहा।
राहुल गांधी के 'विजन' पर उठाए सवाल
हर्ष महाजन ने कहा कि राहुल गांधी के पास विजन की कमी है, जिसका असर कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कामकाज पर दिख रहा है। सांसद सिकंदर कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को संसद में हंगामा करने के बजाय अपने राज्यों की स्थिति पर आत्ममंथन करना चाहिए और वहां के नेताओं को सही दिशा देनी चाहिए।

बजट में 4,000 करोड़ की कटौती
सांसद सिकंदर कुमार ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के बजट में 4,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जो कांग्रेस शासन के तहत एक "चिंताजनक और ऐतिहासिक" गिरावट है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि केंद्रीय योजनाएं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी राज्यों को लाभ पहुंचाती हैं।
संसदीय मर्यादा का उल्लंघन?
भाजपा सांसद मदन राठौर ने राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को संसदीय प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) या जीरो आवर के जरिए मुद्दे उठाने चाहिए। वे कभी सही माध्यम का इस्तेमाल नहीं करते और सिर्फ सुर्खियां बटोरने के बहाने ढूंढते हैं।"