Edited By Radhika,Updated: 24 Mar, 2026 01:07 PM

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही भारत सरकार ने अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। आज यानि की मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश की सुरक्षा और...
नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही भारत सरकार ने अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। आज यानि की मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश की सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए "ब्लूप्रिंट" तैयार किया गया।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
रक्षा मंत्रालय में हुई इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सैन्य और रणनीतिक जगत के दिग्गज शामिल हुए।
- तीनों सेनाओं के प्रमुख: थल सेना, वायु सेना और नौसेना के प्रमुख।
- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS): जनरल अनिल चौहान।
- अन्य अधिकारी: डीआरडीओ (DRDO) प्रमुख, रक्षा सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार।

CCS की बैठक और पीएम ने दिए कड़े निर्देश
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की बैठक हुई। पीएम मोदी ने मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह बनाने का निर्देश दिया है, जो युद्ध के प्रभावों पर बारीकी से नजर रखेगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध की बदलती स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, इसलिए भारतीय नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में ईंधन (Fuel), बिजली और खाद्य सामग्री की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मध्यम और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर प्रभाव
आधिकारिक बयान के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ना तय है। भारत सरकार ने इसके तीन स्तरों पर प्रभाव का आकलन किया है:
- Short-term: urgent supply chain में बाधा।
- Medium & Long-term: ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों पर प्रभाव।