कांग्रेस पर हमलावार हुई बीजेपी, कहा- अवैध मतदाताओं के समर्थन में SIR का राहुल कर रहे थे विरोध

Edited By Updated: 27 May, 2026 03:17 PM

bjp attacks congress says rahul gandhi was protesting against sir in support of

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर Supreme Court of India के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। Bharatiya Janata Party ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया का विरोध इसलिए...

नेशनल डेस्क: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर Supreme Court of India के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। Bharatiya Janata Party ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया का विरोध इसलिए किया क्योंकि वह “अवैध मतदाताओं” के साथ खड़े थे।

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को बताया संवैधानिक
उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव” सुनिश्चित करने की संवैधानिक आवश्यकता को मजबूत करती है। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उचित सुरक्षा उपायों के साथ यह प्रक्रिया संविधान के अनुरूप है और अनुपातिकता की कसौटी पर खरी उतरती है।

भाजपा का राहुल गांधी पर सीधा हमला
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अदालत के फैसले ने राहुल गांधी और कांग्रेस को “बे नकाब” कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे समय SIR प्रक्रिया का विरोध इसलिए किया क्योंकि वह भारतीय मतदाताओं के बजाय “अवैध घुसपैठियों” के साथ खड़ी थी। भाजपा ने इस विरोध को “राष्ट्रविरोधी कृत्य” तक करार दिया।

क्या था पूरा मामला
बिहार में SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि निर्वाचन आयोग को संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत इतने बड़े पैमाने पर विशेष पुनरीक्षण कराने का अधिकार नहीं है।इन याचिकाओं में Association for Democratic Reforms (ADR) की याचिका भी शामिल थी। अदालत ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया।

चुनाव आयोग को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि निर्वाचन आयोग ने अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर कोई कदम नहीं उठाया। फैसले को चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता के लिए अहम माना जा रहा है। फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले चुनावों से पहले यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बनता दिख रहा है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!