Edited By Tanuja,Updated: 02 Jun, 2026 02:49 PM

उद्योगपति हर्ष गोयनका ने स्विट्जरलैंड के एक होटल में भारतीय मेहमानों के लिए अलग नियमों का जिक्र कर नागरिक शिष्टाचार पर बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि विदेशों में कुछ भारतीयों के व्यवहार से देश की छवि प्रभावित होती है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी...
International Desk: दुनिया में भारत आज आर्थिक ताकत, तकनीक और कूटनीति के दम पर अपनी नई पहचान बना रहा है, लेकिन कुछ भारतीयों का सार्वजनिक व्यवहार विदेशों में देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। यही वजह है कि स्विट्जरलैंड के एक होटल को कथित तौर पर भारतीय मेहमानों के लिए अलग नियमों की सूची जारी करनी पड़ी। उद्योगपति हर्ष गोयनका (Harsh Goenka) द्वारा साझा की गई यह घटना अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है।
सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ लोगों की हरकतों की वजह से पूरी दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा पर दाग लग रहा है? क्या विश्वगुरु और महाशक्ति बनने की राह में सबसे बड़ी चुनौती अब नागरिक शिष्टाचार बनता जा रहा है? गोयनका ने दावा किया कि उन्हें Hotel Arc-en-ciel में भारतीय मेहमानों के लिए विशेष निर्देश देखकर हैरानी हुई। गोयनका ने सोशल मीडिया पर भारतीय मेहमानों के लिए अलग से कुछ निर्देशों की सूची शेयर की है जिससे बवाल मच गया है। सूची में कहा गया था कि:
- नाश्ते के बुफे से खाना पैक करके बाहर न ले जाएं।
- केवल होटल द्वारा उपलब्ध कराई गई कटलरी और बर्तनों का ही इस्तेमाल करें।
- गलियारों, कमरों के बाहर और बालकनी में तेज आवाज में बातचीत या शोर-शराबा न करें।
- बुफे में रखा भोजन केवल नाश्ते के लिए है, उसे दोपहर के भोजन के लिए साथ ले जाना प्रतिबंधित है।
- यदि लंच पैक चाहिए तो उसे अलग से खरीदना होगा।
हर्ष गोयनका ने क्या कहा?
गोयनका ने अपनी पोस्ट में कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें कुछ भारतीय हवाई अड्डों, रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार करते दिखाई देते हैं। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोगों ने अपनी विनम्रता, अनुशासन और नागरिक शिष्टाचार से वैश्विक सम्मान हासिल किया है। भारत को भी विश्व शक्ति बनने के साथ-साथ अपने नागरिक व्यवहार पर ध्यान देना होगा।
A Swiss hotel once displayed a list of special rules exclusively for Indian guests which I personally saw and was appalled.
Today, videos of garba in restaurants, loud conversations in airports, and turning aircraft cabins into picnic spots keep doing the rounds. Even in Davos,… pic.twitter.com/ccljdLmDfk
— Harsh Goenka (@hvgoenka) May 31, 2026
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
एक पक्ष का कहना है कि:
- विदेशों में कुछ लोगों का व्यवहार भारत की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
- सार्वजनिक स्थानों पर शोर-शराबा और नियमों की अनदेखी से नकारात्मक धारणा बनती है।
- स्कूल स्तर से नागरिक शिष्टाचार की शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए।
दूसरा पक्ष मानता है कि:
- कुछ लोगों के व्यवहार के आधार पर पूरे देश को नहीं आंका जाना चाहिए।
- भारतीय पर्यटकों और पेशेवरों ने दुनिया भर में अपनी मेहनत और उपलब्धियों से सम्मान अर्जित किया है।
- किसी एक समुदाय या राष्ट्रीयता को अलग से लक्षित करना उचित नहीं है।
भारत के लिए बड़ा संदेश
यह विवाद केवल एक होटल या सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है कि वैश्विक मंच पर किसी देश की पहचान केवल उसकी अर्थव्यवस्था, सेना या तकनीक से नहीं बनती, बल्कि उसके नागरिकों के व्यवहार और सामाजिक संस्कृति से भी बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ विदेशों में भारतीयों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। नियमों का सम्मान, सार्वजनिक अनुशासन और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता किसी भी देश की सकारात्मक छवि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।