Edited By Mansa Devi,Updated: 11 Apr, 2026 02:05 PM

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह विपक्ष से निपटने के लिए इसे ''हथियार'' की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने...
नेशनल डेस्क: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह विपक्ष से निपटने के लिए इसे ''हथियार'' की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने 'पीटीआई-भाषा' से साक्षात्कार में कहा, ''केंद्र सरकार को महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की कोई चिंता नहीं है। अगर उसकी चिंता वास्तविक होती, तो वह इसे तुरंत लागू कर सकती थी लेकिन इसके बजाय, भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विपक्ष से निपटने और जनसंख्या के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने के लिए इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।''
उन्होंने कहा, ''इसलिए परिसीमन को बहाना बनाए बिना महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए।'' प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के अधिकारों की बात सबसे पहले द्रमुक ने ही उठाई थी, क्योंकि उसे समझ में आ गया था कि इस प्रस्तावित प्रक्रिया से राज्य प्रभावित होगा। उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर अपने प्रतिद्वंद्वी और 'ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम' (एआईएडीएमके) के प्रमुख ई. के. पलानीस्वामी पर भी निशाना साधा।
उन्होंने आबादी आधारित परिसीमन के मुद्दे को उठाने के लिए द्रमुक के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि निष्पक्ष परिसीमन के उद्देश्य से संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के तत्वावधान में मुख्यमंत्रियों की बैठक और सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। इसमें 25 वर्ष तक परिसीमन रोकने और 1971 की जनगणना की आबादी के आधार को ही मान्य रखने की मांग की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया है, उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए।'' स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी ने 'तमिलनाडु पोराडुम, तमिलनाडु वेल्लुम' (तमिलनाडु संघर्ष करेगा, तमिलनाडु जीतेगा) का नारा दिया है और यही द्रमुक का रुख है। उन्होंने कहा, ''लेकिन पिछले दरवाजे से भाजपा के प्रवेश के लिए वोट मांगने वाले पलानीस्वामी परिसीमन पर आज तक चुप हैं और यह तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात है।''