Edited By Rohini Oberoi,Updated: 31 Mar, 2026 03:51 PM

एलन मस्क से लेकर दुनिया की बड़ी स्पेस एजेंसियां मंगल और चांद पर इंसानी कॉलोनियां बसाने का सपना देख रही हैं लेकिन एडिलेड यूनिवर्सिटी के एक नए शोध ने इस सपने के सामने एक बड़ा 'बायोलॉजिकल' रोड़ा खड़ा कर दिया है। रिसर्च के अनुसार अंतरिक्ष के कम...
Human Reproduction in Space : एलन मस्क से लेकर दुनिया की बड़ी स्पेस एजेंसियां मंगल और चांद पर इंसानी कॉलोनियां बसाने का सपना देख रही हैं लेकिन एडिलेड यूनिवर्सिटी के एक नए शोध ने इस सपने के सामने एक बड़ा 'बायोलॉजिकल' रोड़ा खड़ा कर दिया है। रिसर्च के अनुसार अंतरिक्ष के कम गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में इंसानों का प्रजनन करना बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भूलभुलैया में खो जाते हैं स्पर्म
वैज्ञानिकों ने माइक्रोग्रैविटी का अनुभव कराने वाली '3D क्लिनोस्टेट' मशीन के जरिए इंसानों और स्तनधारियों के शुक्राणुओं (Sperm) पर परीक्षण किया। धरती पर गुरुत्वाकर्षण स्पर्म को सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है लेकिन अंतरिक्ष में स्पर्म अपनी दिशा खो देते हैं। जब स्पर्म को महिला प्रजनन पथ जैसी कृत्रिम भूलभुलैया में रखा गया तो वे सीधा रास्ता तय करने में नाकाम रहे। सामान्य गुरुत्वाकर्षण की तुलना में माइक्रोग्रैविटी में लक्ष्य तक पहुंचने वाले स्पर्म की संख्या में भारी गिरावट देखी गई।

प्रजनन क्षमता पर 30% की मार
स्टडी के नतीजे बताते हैं कि गुरुत्वाकर्षण की कमी का असर केवल रास्ता भटकने तक सीमित नहीं है:
फर्टिलाइजेशन में कमी: जीरो ग्रेविटी में 4 घंटे रहने के बाद चूहों के स्पर्म की अंडे को फर्टिलाइज करने की क्षमता 30 प्रतिशत तक कम हो गई।
भ्रूण के विकास में देरी: जो भ्रूण बन भी गए, उनमें कोशिका विभाजन (Cell Division) धीमा पाया गया और उनके जीवित रहने की संभावना कम दिखी।

क्या है समाधान?
हालांकि यह रिसर्च पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। वैज्ञानिकों ने पाया कि 'प्रोजेस्टेरोन' (Progesterone) नामक सेक्स हार्मोन इस समस्या का समाधान बन सकता है। जब स्पर्म को इस हार्मोन की अधिक खुराक दी गई तो उनकी दिशा खोजने की क्षमता वापस लौट आई और वे सामान्य तरीके से व्यवहार करने लगे। इससे उम्मीद जगी है कि भविष्य में दवाओं की मदद से अंतरिक्ष में गर्भधारण संभव हो सकेगा।
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स्पेस में प्रेगनेंसी के 4 बड़े खतरे
यदि अंतरिक्ष में गर्भधारण हो भी जाता है तो बच्चे के जन्म और विकास में ये बाधाएं आ सकती हैं। अंतरिक्ष की 'कॉस्मिक किरणें' भ्रूण की कोशिकाओं को डैमेज कर सकती हैं जिससे बच्चा विकलांग या गंभीर बीमारियों के साथ पैदा हो सकता है। बिना गुरुत्वाकर्षण के डिलीवरी की प्रक्रिया और स्तनपान (Breastfeeding) कराना बेहद जटिल और खतरनाक होगा।

गुरुत्वाकर्षण के बिना बच्चे की हड्डियों का ढांचा कमजोर रह सकता है और उसके दिमाग की याददाश्त और व्यवहार पर बुरा असर पड़ सकता है। स्पेस बेबी के शरीर के अंगों के बीच तालमेल (Coordination) बिठाने की क्षमता धरती के बच्चों से काफी अलग और कमजोर हो सकती है।