बीजिंग में चीनी छात्रा ने दी पहली भरतनाट्यम एकल प्रस्तुति, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

Edited By Updated: 24 Aug, 2025 07:45 PM

chinese student her solo bharatanatyam debut in beijing

चीन की 17 वर्षीय एक लड़की ने प्राचीन भारतीय नृत्य शैली भरतनाट्यम में एकल प्रस्तुति “अरंगेत्रम” देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दूसरी चीनी छात्रा बन गई..

Bejing: चीन की 17 वर्षीय एक लड़की ने प्राचीन भारतीय नृत्य शैली भरतनाट्यम में एकल प्रस्तुति “अरंगेत्रम” देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दूसरी चीनी छात्रा बन गई है। यह चीन में युवाओं के बीच भरतनाट्यम की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। दक्षिण भारत के प्राचीन नृत्य भरतनाट्यम के कलाकारों की दर्शकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के सामने मंच पर उनकी पहली प्रस्तुति को ‘अरंगेत्रम' कहा जाता है। झांग जियायुआन ( Zhang Jiayuan)ने शुक्रवार रात बीजिंग के एक खचाखच भरे सभागार में अपना अरंगेत्रम प्रस्तुत किया।

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झांग की प्रस्तुति के दौरान भारत के उप-राजदूत अभिषेक शुक्ला के अलावा प्रसिद्ध चीनी भरतनाट्यम कलाकार जिन शान शान भी दर्शकों में शामिल रहीं। झांग को रिया के नाम से भी जाना जाता है। वह अरंगेत्रम प्रस्तुत करने वाली चीन में प्रशिक्षित दूसरी चीनी शिष्या हैं। पिछले साल लगभग इसी समय 13 वर्षीय लेई मुजी चीन में प्रशिक्षित पहली चीनी भरतनाट्यम नृत्यांगना बनी थीं। उन्होंने भारत की प्रसिद्ध भरतनाट्यम कलाकार लीला सैमसन के सामने अरंगेत्रम की सफल प्रस्तुति दी थी। जिन शान शान ने लीला सैमसन के मार्गदर्शन में यह नृत्य विधा सीखी थी। जिन ने चेन्नई के प्रसिद्ध कलाक्षेत्र फाउंडेशन में भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। चीन में भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के प्रति जुनून प्रख्यात चीनी नृत्यांगना झांग जुन (1933-2012) ने जगाया था।

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उन्होंने भरतनाट्यम, कथक एवं ओडिसी सीखने और उन्हें चीन में लोकप्रिय बनाने की अपनी अथक इच्छा से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। रिया ने पांच साल की उम्र में भरतनाट्यम सीखना शुरू किया और बाद में वह 12 साल की उम्र में जिन द्वारा संचालित एक विशेष नृत्य विद्यालय की शिष्य बनीं। रिया ने अपनी प्रस्तुति के बाद अपनी गुरु को गले लगाया और कहा कि पिछले पांच साल से अरंगेत्रम की तैयारी करना कठिन काम था और वह रोजाना पांच घंटे अभ्यास करती थीं। शुक्ला ने रिया को सम्मानित किया। उन्होंने सबसे जटिल भारतीय नृत्य कला विधा को सीखने में रिया की रुचि और समर्पण की प्रशंसा की। 

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