Edited By Radhika,Updated: 16 Feb, 2026 02:10 PM

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सोशल मीडिया पोस्ट और कथित विवादित बयानों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे इस...
नेशनल डेस्क: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सोशल मीडिया पोस्ट और कथित विवादित बयानों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे इस मामले को लेकर संबंधित हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते?
सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि यह एक समुदाय को निशाना बनाने का मामला है और पूरे देश का मुद्दा है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए, तो CJI सूर्यकांत ने कहा "समस्या यह है कि जब चुनाव आते हैं, तो कई बार चुनावी जंग सुप्रीम कोर्ट के अंदर लड़ी जाती है। क्या इसका मतलब यह है कि देश की हर छोटी-बड़ी घटना पर सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करे?" CJI ने आगे कहा कि हाई कोर्ट में भी सक्षम जज और वकील मौजूद हैं, ऐसे में याचिकाकर्ताओं को सीधे सर्वोच्च अदालत आने के बजाय पहले वहां जाना चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
वामपंथी नेताओं और कुछ नागरिक समूहों ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 'मिया' मुस्लिमों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है और उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की बात कही है। इसके अलावा, असम भाजपा के हैंडल से पोस्ट किए गए एक एनिमेटेड वीडियो पर भी आपत्ति जताई गई है, जिसमें मुख्यमंत्री को निशाना साधते हुए दिखाया गया था।
अदालत ने फिलहाल इन याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने की बात कही है, लेकिन याचिकाकर्ताओं को न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने और हाई कोर्ट का विकल्प चुनने के संकेत दिए हैं।