दीवाली तक थम सकता है CJP का विरोध प्रदर्शन, आखिर क्यों आंदोलन से विराम चाहते हैं अभिजीत दीपके?

Edited By Updated: 21 Oct, 2026 05:32 AM

cjp s protest may end by diwali

मई महीने से केंद्र सरकार की नाक में दम करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने विरोध प्रदर्शनों पर फिलहाल ब्रेक लगाने का फैसला किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दशहरा पर जारी 16 मिनट के एक भावुक वीडियो संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं और...

नई दिल्लीः मई महीने से केंद्र सरकार की नाक में दम करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने विरोध प्रदर्शनों पर फिलहाल ब्रेक लगाने का फैसला किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दशहरा पर जारी 16 मिनट के एक भावुक वीडियो संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आने वाले त्यौहारों के दौरान अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की है। माना जा रहा है कि पार्टी ने दिवाली तक अपने सभी आंदोलनों को स्थगित करने का मन बनाया है।

सह-संयोजकों की गिरफ्तारी के बाद भावुक हुए दीपके 
अपने वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके पार्टी के सह-संयोजकों आशुतोष रांका और सौरव दास के न्यायिक हिरासत में होने पर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जंतर-मंतर को विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद वहां तिरंगा लेकर पहुंचने के कारण दास और रांका को गिरफ्तार कर लिया गया था। दीपके ने कहा, "यह लड़ाई हमारा फैसला थी, लेकिन इसके परिणाम हमारे परिवारों को भुगतने पड़ रहे हैं। हमारे समर्थकों के परिजनों के लिए यह दौर बहुत कठिन रहा है।" उन्होंने अपील की कि त्यौहारों के दौरान सभी अपने परिवार के साथ रहें, लेकिन जेल में बंद सौरव और आशुतोष को भी याद रखें।

रणनीतिकारों की अनुपस्थिति में ठप पड़ा 16 अक्टूबर का 'तिरंगा मार्च' 
CJP के विरोध प्रदर्शनों की पूरी रणनीति और योजना बनाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से आशुतोष रांका और सौरव दास के पास ही थी। 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस पर आयोजित होने वाला 'तिरंगा मार्च' दीपके की हिरासत और दोनों सह-संयोजकों के जेल में होने के कारण पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। नेतृत्वहीन होने की वजह से इस मार्च को रद्द करना पड़ा था। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिवाली तक दोनों नेताओं की रिहाई हो जाएगी, जिसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

'रिजीम चेंज' और फ्रांस दंगों की तुलना से दूरी बनाने की कोशिश 
विरोध प्रदर्शन रोकने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि CJP के आंदोलनों की तुलना फ्रांस में शिक्षा सुधारों को लेकर भड़के हिंसक दंगों, आगजनी व लूटपाट से की जाने लगी थी। हालांकि दीपके ने इन तुलनाओं को खारिज करते हुए कहा कि उनके नेता हंसते हुए गिरफ्तारियां देते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा देश में 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) की विदेशी साजिशों को लेकर दी जा रही चेतावनियों के बीच CJP खुद को किसी भी बड़े विवाद से दूर रखना चाहती है।

मई से अब तक CJP के प्रमुख आंदोलन

  • स्थापना और सोशल मीडिया पर धूम: सीजेआई सूर्यकांत द्वारा सिस्टम के कुछ लोगों को 'परजीवी' और 'कॉकरोच' कहने की टिप्पणी के विरोध में 16 मई को CJP का गठन हुआ था। देखते ही देखते इस पार्टी के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हो गए।
  • NEET परीक्षा धांधली और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: 6 जून को अमेरिका से भारत लौटने के बाद दीपके ने सोनम वांगचुक के साथ मिलकर जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन चलाया। पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस के बावजूद डटे रहने के बाद 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
  • 'स्कूल ठीक करो' अभियान: अगस्त में CJP ने देशभर में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और शिक्षकों की कमी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा: सितंबर के अंत में CJP ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था।

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