Edited By Sanjeev,Updated: 04 Oct, 2026 10:41 AM

कैप्टन स्मित मच्छार, जिन्होंने इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई के एक विमान को क्रैश कराने की कथित कोशिश को नाकाम किया था, ने कॉकपिट के अंदर के उन डरावने पलों को याद किया जब उन्हें एहसास हुआ कि उनका को-पायलट उन पर हमला करने वाला है। इस घटना में गंभीर रूप से...
यरूशलम : कैप्टन स्मित मच्छार, जिन्होंने इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई के एक विमान को क्रैश कराने की कथित कोशिश को नाकाम किया था, ने कॉकपिट के अंदर के उन डरावने पलों को याद किया जब उन्हें एहसास हुआ कि उनका को-पायलट उन पर हमला करने वाला है। इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मच्छार ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करते हुए उस मुश्किल अनुभव के बारे में बताया। नेतन्याहू ने पायलट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजराइल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है।
मच्छार ने बताया कि उड़ान एक सामान्य यात्रा की तरह शुरू हुई थी और वह सामने देख रहे थे जबकि उनके को-पायलट नमाज पढ़ रहे थे। मच्छार के अनुसार, शुरू में उन्हें शक करने की कोई वजह नहीं दिखी कि कुछ गलत हो रहा है। उन्होंने कहा कि को-पायलट ने उनसे कहा था कि वह नमाज पढ़ना करना चाहते हैं (जिसे उन्होंने स्थानीय यात्रियों और क्रू सदस्यों के बीच एक आम बात बताया) और इसलिए सम्मान के तौर पर वह कॉकपिट में सामने की ओर देखने लगे।
कैप्टन मच्छार ने कहा, 'जब वह नमाज पढ़ रहे थे, तो सम्मान के नाते मैं सामने देख रहा था, पीछे नहीं। और अचानक, लगभग चार-पांच मिनट बाद मेरे सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार प्रहार हुआ।' मच्छार ने कहा कि पहले जोरदार प्रहार के बाद उनके मन में सबसे पहला ख्याल यही आया कि विमान के साथ कुछ बहुत बुरा हुआ है। उन्होंने कहा, 'मेरा पहला ख्याल यही था कि विमान को कोई बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, कुछ तो गड़बड़ है... लेकिन उसके बाद एक के बाद एक प्रहार होते रहे और तभी मुझे एहसास हुआ कि यह विमान की वजह से नहीं, बल्कि मेरे साथ कॉकपिट में मौजूद दूसरे व्यक्ति की वजह से हो रहा है।'
पायलट ने बताया कि उन्होंने हमलावर को रोकने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती प्रहारों से उनकी नजर पर बुरा असर पड़ा था और उन्हें साफ-साफ देखने में मुश्किल हो रही थी। मच्छार ने कहा, 'मैंने उसे रोकने की कोशिश तो की, लेकिन उसके शुरुआती प्रहारों की वजह से मेरी नजर लगभग खत्म हो गई थी और मुझे सब कुछ धुंधला दिखाई दे रहा था। और उस समय, मुझे अगला एहसास यह हुआ कि विमान तेजी से नीचे जा रहा था। मेरी यादें अभी भी बिखरी हुई हैं, लेकिन उस समय की कुछ बातें मुझे याद हैं।'
मच्छार ने बताया कि हाथापाई के दौरान उन्होंने एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की थी, लेकिन उन्हें लगा कि को-पायलट ने उसे बाद में फिर से बंद कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने एक बार दरवाजा खोलने की कोशिश की और कामयाब भी हुआ, लेकिन मुझे लगता है कि उसने उसे वापस बंद कर दिया। और उस समय, मुझे याद है, मैं कॉकपिट के फर्श पर लेटा हुआ था, और मुझे हवाई जहाज की हलचल, तेज हवा की आवाज और लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी।'
मच्छार ने बताया कि उसी पल उन्हें एहसास हुआ कि हवाई जहाज को गिरने से बचाने का उनके पास एक आखिरी मौका है। चोटों और हमले के बावजूद उन्होंने कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की एक और कोशिश करने का फैसला किया। उन्होंने कहा, 'और जैसा कि मैं यहां एम्बेसडर को बता रहा था, मुझमें एक आखिरी लड़ाई लड़ने की हिम्मत बची थी... इसे निजी वजह कहें या लोगों के लिए की गई कोशिश, मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मैं मर जाता और तभी मैंने पूरी ताकत लगा दी... मैंने अपनी पूरी जान लगा दी और दरवाजे की तरफ बढ़ा और उसे खोल दिया। और शुक्र है कि लोग वापस हमला करने के लिए तैयार थे... उन्होंने कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया और बाकी तो आप जानते ही हैं।'
इज़राइल के प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं आपकी हिम्मत और मुश्किल हालात में भी शांत रहकर सही फैसला लेने की आपकी काबिलियत से हैरान हूं।' उन्होंने कहा कि कैप्टन ने जो किया वह काबिले-तारीफ था और किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि पायलट ने सिर्फ हवाई जहाज में सवार लोगों की जान ही नहीं बचाई। नेतन्याहू ने कहा, 'आपने बहुत से लोगों की जान बचाई। मुझे लगता है कि आपने उससे भी बड़ी चीज बचाई। आपने दुनिया को यह एहसास दिलाया कि एक बहादुर पायलट और बहादुर यात्री इस बुराई का सामना कर सकते हैं, चाहे वह कितनी भी खतरनाक या हिंसक क्यों न हो। दुनिया भर में इसकी सही मायने में तारीफ हो रही है।' उन्होंने आगे कहा, 'आप इजराइल के हीरो हैं। आप भारत के हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं।'