Edited By Radhika,Updated: 03 May, 2026 03:07 PM

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर की गई कथित टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद...
नेशनल डेस्क: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर की गई कथित टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचे पवन खेड़ा का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया।
संविधान और न्यायपालिका पर जताया भरोसा
एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा, "बाबा साहेब अंबेडकर का बनाया हुआ हमारा संविधान हर उस व्यक्ति की मदद करता है जो किसी मुसीबत में है या किसी दमनकारी सरकार के खिलाफ लड़ रहा है। मुझे सुप्रीम कोर्ट से जो राहत मिली है, वह इसी संविधान की वजह से संभव हो पाई है।"

सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें खेड़ा को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जांच अपनी जगह है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली व्यक्तिगत आजादी (Individual Liberty) को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि खेड़ा को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें तुरंत अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। हालांकि, उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा और कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ना होगा।

कांग्रेस ने बताया 'न्याय की जीत'
कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंहवी ने जोर दिया कि गिरफ्तारी कोई रूटीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि 'अंतिम विकल्प' होना चाहिए, खासकर मानहानि जैसे मामलों में। कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए एक सबक है जो गिरफ्तारी को अपमानित करने और राजनीतिक हिसाब चुकता करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जयराम रमेश ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में 'न्याय की लौ' अभी भी जल रही है और न्यायपालिका में लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।