Edited By Mahima,Updated: 14 Dec, 2023 02:47 PM

देश के हर तीन में से एक से अधिक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ने मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक अपना कर्ज सकल राज्य उत्पाद (GSDP ) का 35% तक होने का अनुमान जताया है। ऐसे में आरबीआई ने 12 राज्यों के वित्तीय कुप्रबंधन पर चिंता जताई है। ये राज्य हैं-...
नेशनल डेस्क: देश के हर तीन में से एक से अधिक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ने मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक अपना कर्ज सकल राज्य उत्पाद (GSDP ) का 35% तक होने का अनुमान जताया है। ऐसे में आरबीआई ने 12 राज्यों के वित्तीय कुप्रबंधन पर चिंता जताई है। ये राज्य हैं- राजस्थान, पंजाब, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, हिमाचल प्रदेश, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और नगालैंड।
रबीआई ने हालिया सालाना रिपोर्ट में इन राज्यों को चेतावनी दी है कि गैर-जरूरी वस्तुओं और सेवाओं पर सब्सिडी देने और लोक-लुभावनी गारंटी के लिए कोई भी अतिरिक्त आवंटन नाजुक राजकोषीय स्थिति को खतरे में डाल सकता है। इससे पिछले दो साल में किए गए प्रयास बेकार हो सकते हैं। इन राज्यों ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को 4% से अधिक होने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी केंद्रशासित प्रदेश ने अपना कर्ज 35% से ऊपर जाने का अनुमान नहीं जताया है।
इन राज्यों में कम हुआ कर्ज का बोझ
उच्च कर्ज जाल से बाहर आने वाले राज्य- आंध्र प्रदेश, झारखंड, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश को छोड़कर इनमें से प्रत्येक ने चालू वर्ष के अंत में भी अपना कर्ज GSDP के 30% को पार करने का अनुमान लगाया है। यूपी ने यह एक साल पहले के 30.7% से घटकर 28.6% तक लाने का अनुमान लगाया है।
पंजाब राजस्व का 22% ब्याज में दे रहा
उच्च कर्ज होने से प्रदेशों को मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में ही खर्च हो जाता है। उदाहरण के लिए पंजाब के चालू वित्त वर्ष के लिए राजस्व प्राप्तियों में ब्याज भुगतान का योगदान 22.2% है। इसी तरह पश्चिम बंगाल ने 20.11%, केरल ने 19.47%, हिमाचल प्रदेश ने 14.6% और राजस्थान ने 13.8% राजस्व आय ब्याज चुकाने में खर्च होने का अनुमान लगाया है।
बिहार ही नहीं, गोवा जैसा समृद्ध प्रदेश भी कर्ज के जाल मेंः ऐसा नहीं है कि केवल बिहार जैसे गरीब राज्यों पर ही अधिक कर्ज है। देश में प्रति व्यक्ति आय के मामले में अव्वल राज्य गोवा ने 2023-24 के अंत में अपना कर्ज-GSDP अनुपात 38.3% होने का अनुमान लगाया है। यह कोविड प्रभावित वर्ष के 35.2% से भी अधिक है।