Edited By Anu Malhotra,Updated: 04 Sep, 2026 02:21 PM

दिल्ली के कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ज़ोमैटो (Zomato) पर सेवा में लापरवाही के लिए 8,250.61 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह फैसला एक ग्राहक द्वारा परिवार की जन्मदिन की पार्टी के लिए दिए गए दो फूड ऑर्डर एकतरफा...
नई दिल्ली: दिल्ली के कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ज़ोमैटो (Zomato) पर सेवा में लापरवाही के लिए 8,250.61 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह फैसला एक ग्राहक द्वारा परिवार की जन्मदिन की पार्टी के लिए दिए गए दो फूड ऑर्डर एकतरफा रद्द करने और पैसे वापस न करने के मामले में सुनाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अगस्त 2024 में मनोज कुमार जिन्होंने Zomato का 'गोल्ड' मेंबर ले रखा है वह अपनी भतीजी के जन्मदिन के मौके पर प्लेटफॉर्म से 5 अलग-अलग फ़ूड ऑर्डर दिए थे। इनमें से तीन ऑर्डर डिलीवर हो गए, लेकिन 146.73 रुपए और 103.88 रुपए (कुल ₹250.61) की कीमत वाले दो ऑर्डर डिलीवर नहीं किए गए।
Zomato ने दावा किया कि ग्राहक का फोन 'नॉट रीचेबल' था, इसलिए ऑर्डर रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही कंपनी ने कैंसलेशन चार्ज का हवाला देते हुए रिफंड देने से भी साफ इनकार कर दिया। कंज्यूमर फ़ोरम ने ज़ोमैटो को रद्द किए गए ऑर्डर की रकम ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और अपमान के लिए ₹5,000 का मुआवज़ा और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर 3,000 रुपए देने का भी आदेश दिया।
आयोग ने नोट किया कि मनोज कुमार 'ज़ोमैटो गोल्ड' मेंबर थे और प्राथमिकता वाली सेवा के हकदार थे। इसके बावजूद कंपनी ने न केवल खाना डिलीवर नहीं किया, बल्कि जबरन कैंसलेशन फीस भी काट ली। यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत 'सेवा में भारी कमी' और 'अनुचित व्यापार व्यवहार' का मामला है।
Zomato को शिकायत का नोटिस भेजा गया था, लेकिन वह तय समय के भीतर पेश नहीं हुआ और न ही अपना लिखित जवाब दाखिल किया। इसलिए, कमीशन ने 10 जून, 2025 को कंपनी के खिलाफ़ एक-तरफ़ा (बिना बचाव के) कार्यवाही की। इसके बाद मनोज कुमार ने हलफ़नामे के ज़रिए सबूत पेश किए और दो ऑर्डर की समरी, कस्टमर-सपोर्ट चैट ट्रांसक्रिप्ट और कानूनी नोटिस दिखाए। चूंकि Zomato ने उनके दावों का विरोध नहीं किया था, इसलिए आयोग ने पाया कि मनोज कुमार के सबूतों को काटा नहीं गया था। इसलिए, आयोग ने सेवा में कमी के लिए Zomato को ज़िम्मेदार ठहराया और उसे मुआवज़े और खर्च के अलावा, आदेश की तारीख से लेकर भुगतान होने तक 6% सालाना ब्याज के साथ 250.61 रुपए वापस करने का निर्देश दिया इसके साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹5,000 और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर 3,000 रुपए भी देने का आदेश दिया। ज़ोमैटो को 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।