बड़े अफसर की बेटी का फंदे से झूलता मिलता शव, पुलिस कर रही जांच

Edited By Updated: 13 Nov, 2025 11:53 PM

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नागपुर के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) परिसर से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने पूरे चिकित्सा जगत और पुलिस विभाग को झकझोर दिया है। सीआरपीएफ पुणे के DIG, आईपीएस कृष्णकांत पांडे की 25 वर्षीय बेटी समृद्धि कृष्णकांत पांडे ने...

नेशनल डेस्क: नागपुर के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) परिसर से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने पूरे चिकित्सा जगत और पुलिस विभाग को झकझोर दिया है। सीआरपीएफ पुणे के DIG, आईपीएस कृष्णकांत पांडे की 25 वर्षीय बेटी समृद्धि कृष्णकांत पांडे ने सोमवार शाम अपने फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह एम्स नागपुर के डर्मेटोलॉजी विभाग की फर्स्ट ईयर की प्रतिभाशाली छात्रा थीं।

पंखे से लटका मिला शव, पिता के फोन नहीं उठाए

जानकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना 12 नवंबर की शाम करीब 7 बजे की है। समृद्धि नागपुर के शिव कैलाश स्थित मंजीरा अपार्टमेंट में अकेली रहती थीं। शाम को पिता कृष्णकांत पांडे ने जब बार-बार फोन किया और बेटी ने जवाब नहीं दिया, तो उन्होंने उसकी सहपाठी को संपर्क करने के लिए कहा। जब सहपाठी फ्लैट पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। पीछे के रास्ते से अंदर जाने पर समृद्धि को पंखे से लटका हुआ पाया गया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

अब तक आत्महत्या की वजह अज्ञात

घटना की सूचना मिलते ही सोनेगांव पुलिस मौके पर पहुंची, पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया। पुलिस अधिकारी ने बताया- “प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। समृद्धि पिछले कुछ दिनों से तनाव में थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल जांच से आगे की जानकारी मिलेगी।” पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और समृद्धि के दोस्तों व सहपाठियों से गोपनीय रूप से पूछताछ की जा रही है ताकि इस कदम के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

मानसिक तनाव पर उठे सवाल

इस घटना से एम्स नागपुर परिसर में गहरा सन्नाटा और शोक छा गया है। समृद्धि को उनके शिक्षक और सहपाठी एक विनम्र, संवेदनशील और होनहार छात्रा के रूप में जानते थे। सभी के मन में एक ही सवाल- “आख़िर इतनी उज्ज्वल ज़िंदगी ने अंधेरे को क्यों चुना?” यह घटना एक बार फिर मेडिकल छात्रों में बढ़ते मानसिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा की गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचती है।

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