आय से अधिक संपत्ति का मामला: पूर्व डीजीपी को झटका, उच्च न्यायालय ने नहीं दी राहत

Edited By Updated: 22 Sep, 2026 11:17 AM

disproportionate assets case setback for former dgp high court grants no relief

केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचनकारी की सजा पर रोक संबंधी कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया तथा उनकी अपील के सिलसिले में राज्य सरकार को अपना...

कोच्चि : केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचनकारी की सजा पर रोक संबंधी कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया तथा उनकी अपील के सिलसिले में राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी। 

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने अभियोजन पक्ष को अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए 2 दिन का समय दिया और मामले की सुनवाई 24 सितंबर के लिए तय की। उच्च न्यायालय ने थाचनकारी की अपील पर यह आदेश दिया। थाचनकारी को पिछले बृहस्पतिवार को सतर्कता अदालत ने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में चार साल की कैद की सजा सुनायी थी। 

पूर्व डीजीपी ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सतर्कता अदालत ने पूर्व डीजीपी पर 30.84 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अपनी याचिका में थाचनकारी ने कहा है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से दर्ज प्राथमिकी में शुरू में एक जनवरी, 2003 और एक मार्च, 2005 के बीच कथित तौर पर अर्जित की गई संपत्ति को शामिल किया गया था लेकिन बाद में इसे चार जुलाई, 2007 तक बढ़ा दिया गया। 

याचिका में कहा गया है कि चार जुलाई, 2007 को कई जगहों पर तलाशी ली गई और दस्तावेज जब्त किए गए। याचिका के अनुसार जांच के बाद एक अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई और इसके बाद मामले को अलग-अलग सतर्कता अदालतों के बीच हस्तांतरित किया गया। आखिरकार 2020 में कोट्टायम की सतर्कता अदालत ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद राज्य सरकार ने और जांच के आदेश दिए, क्योंकि थाचनकारी ने शिकायत की थी कि उनकी आय के कई स्रोतों पर विचार नहीं किया गया था और जांच अधिकारी की गणना में गलतियां थीं। 

बाद में उच्च न्यायालय ने आगे की जांच के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था और कहा था कि सरकार ऐसी जांच का आदेश नहीं दे सकती। हालांकि, अपील में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने जांच एजेंसी को आगे की जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी थी। थाचनकारी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 'केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ़ प्रैक्टिस' के नियम 19(4) के तहत आवेदन देने के बावजूद, उनमें से कोई भी दस्तावेज अधीनस्थ अदालत के सामने पेश नहीं किया गया। उन्होंने तर्क दिया है कि सुनवाई के दौरान सीआरपीसी की धारा 313 के तहत पूछताछ किए जाने पर उन्होंने उन परिस्थितियों से इनकार किया था जिनसे उन पर आरोप लग रहे थे। 

उन्होंने एक और बयान भी दिया था जिसमें उन्होंने हिसाब-किताब में गलतियों और उन हालात के बारे में बताया था जिनकी वजह से उन्हें कथित तौर पर झूठे मामले में फंसाया गया था। थाचनकारी ने अपील में यह भी कहा है कि उन्हें दोषी ठहराया जाना गलत और गैर-कानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सबूतों को गलत तरीके से समझा गया और जांच अधिकारियों द्वारा किए गए गलत हिसाब-किताब पर भरोसा किया गया। 

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