'तलाकशुदा बेटी मंजूर, लेकिन मृत बेटी नहीं' - Twisha Sharma केस पर MP सरकार की भावुक दलील

Edited By Updated: 25 May, 2026 03:18 PM

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भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि फिलहाल किसी अतिरिक्त आदेश की जरूरत नहीं है क्योंकि राज्य सरकार पहले ही केस ट्रांसफर करने का प्रस्ताव दे चुकी है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य...

Twisha Sharma: भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि मामले की 'निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच' बेहद जरूरी है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले की सराहना की, जिसमें केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश की गई है। अदालत ने कहा कि फिलहाल किसी अतिरिक्त आदेश की जरूरत नहीं है क्योंकि राज्य सरकार पहले ही केस ट्रांसफर करने का प्रस्ताव दे चुकी है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा, “तलाकशुदा बेटी बेहतर है, लेकिन मृत बेटी नहीं।”

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि सभी पक्षों के हित में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच संभालनी चाहिए। कोर्ट ने माना कि मामले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और सार्वजनिक स्तर पर भी निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में जांच में कथित संस्थागत पक्षपात और कुछ विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट के मुताबिक, आरोपियों के परिवार का न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा होना भी लोगों की चिंता का कारण बना।

कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के पति समार्थ सिंह पेशे से वकील हैं, जबकि उनकी सास गिरीबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह धारणा बन रही थी कि जांच प्रभावित हो सकती है। पीठ ने मीडिया और दोनों पक्षों से अपील की कि जांच पूरी होने तक सार्वजनिक बयानबाजी से बचें। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़ी बातें जांच एजेंसी के सामने रखी जानी चाहिए, न कि सार्वजनिक मंचों पर।

क्या है पूरा मामला?
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था और यह आत्महत्या नहीं बल्कि उत्पीड़न का मामला है।

वहीं ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा मानसिक तनाव और नशे की समस्या से जूझ रही थीं। मामला तब और ज्यादा चर्चा में आया जब ट्विशा के परिवार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के निवास के बाहर प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद राज्य सरकार ने परिवार को भरोसा दिया कि केस की जांच CBI को सौंपी जाएगी।

पति पुलिस हिरासत में
ट्विशा के पति समार्थ सिंह को भोपाल की अदालत ने शनिवार को पुलिस हिरासत में भेज दिया था। इसी बीच सुप्रीम Court ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने माना कि शुरुआती जांच और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग
ट्विशा के परिवार ने AIIMS दिल्ली से स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग की थी। परिवार का आरोप है कि पहले पोस्टमॉर्टम में कई अहम पहलुओं की सही तरीके से जांच नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि ट्विशा के हाथ और शरीर पर चोट के निशान थे, लेकिन उनकी गहराई और उम्र का सही परीक्षण नहीं किया गया। साथ ही गर्दन और रीढ़ की रेडियोलॉजिकल जांच भी नहीं हुई।

अंतिम संस्कार
करीब 12 दिन तक न्याय की मांग के बाद रविवार शाम भोपाल में ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार किया गया। उनके भाई हर्षित शर्मा ने मुखाग्नि दी। परिवार ने कहा कि यह सिर्फ अंतिम विदाई नहीं बल्कि न्याय की लड़ाई की शुरुआत है।


 

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