सरकार के प्रयासों से पराली जलाने के मामले लगातार घट रहे हैं: कृषि मंत्री चौहान

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 05:14 PM

due to the efforts of the government cases of stubble burning are continuously

शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में शुक्रवार को कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराने के कारण खास तौर पर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामले लगातार घट रहे हैं।

नेशनल डेस्क: शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में शुक्रवार को कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराने के कारण खास तौर पर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामले लगातार घट रहे हैं। प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में चौहान ने कहा कि पराली जलाना प्रदूषण का एकमात्र कारण नहीं है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यह सर्दियों में भी कुल प्रदूषण में केवल पांच प्रतिशत योगदान करता है। उन्होंने कहा कि उद्योग और वाहन भी मुख्य प्रदूषण स्रोत हैं, लेकिन अक्सर किसानों को दोषी ठहराया जाता है। उच्च सदन में कृषि मंत्री ने बताया कि हालांकि किसानों के लिए खेत साफ करने का आसान तरीका पराली जलाना है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं।

''इनमें फसल के अनुकूल कीटों का नाश, मिट्टी की उर्वरता में कमी, पोषक तत्व और कार्बन की हानि शामिल है। इसी कारण सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन (क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट सीआरएम) योजना शुरू की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीन खरीदने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है, जबकि इन मशीनों को किराए पर किसानों को उपलब्ध कराने वाले संस्थानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।

चौहान ने कहा कि अब तक 3.5 लाख से अधिक किसानों को मशीनें दी जा चुकी हैं, जिनमें पंजाब के 1,60,296 किसान, हरियाणा के 1,10,550 किसान और उत्तर प्रदेश के 76,135 किसान शामिल हैं। ''इसके परिणामस्वरूप पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामले काफी हद तक घट गए हैं।'' कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में केवल 17 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है और सरकार इस दिशा में और प्रयास कर रही है।

दालों के उत्पादन में गिरावट संबंधी सवाल पर चौहान ने कहा कि सरकार कृषि वैज्ञानिकों के साथ मिलकर उच्च गुणवत्ता वाले बीज विकसित कर रही है ताकि फसल उत्पादन बेहतर हो। उन्होंने कहा कि चरम मौसम की परिस्थितियां भी फसल उत्पादन को प्रभावित करती हैं। उन्होंने बताया कि 2016 में भारत सबसे बड़ा दाल आयातक था, लेकिन प्रौद्योगिकी, बेहतर बीज और किसानों के लिए सुविधाओं के कारण देश ने 'दलहन क्रांति' देखी और 2021–22 में रिकॉर्ड दो करोड़ 73 लाख टन उत्पादन हुआ।

चौहान ने कहा कि केवल 2024–25 में ही दालों के उत्पादन में गिरावट आई, और इसके लिए सरकार ने 'दलहन मिशन' शुरू किया है, जिसमें बेहतर बीज विकास और पारंपरिक बीजों के प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) जैसी पहल शामिल हैं। मध्य प्रदेश में मूंग उत्पादन के सवाल पर चौहान ने कहा कि अब राज्य में गर्मियों के मौसम में भी 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक मूंग उत्पादन हो रहा है। 

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