Shani Pradosh Vrat 2026: साल का पहला शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी को, करें ये उपाय साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी राहत

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 01:27 PM

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Shani Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और भगवान शिव को समर्पित होता है। जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी वार के अनुसार उसका नाम होता है।...

Shani Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और भगवान शिव को समर्पित होता है। जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी वार के अनुसार उसका नाम होता है। जब त्रयोदशी तिथि शनिवार को पड़ती है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत या शनि त्रयोदशी कहा जाता है। वर्ष 2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ शनि देव की भी विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और उपाय करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में राहत मिलती है।

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शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद का समय) में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए शनि प्रदोष व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस दिन शिव आराधना के साथ शनिदेव की पूजा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं।

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साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत के लिए उपाय
उड़द और लोहे का दान

काला और गहरा नीला रंग शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है। शनि प्रदोष के दिन शनिदेव को काली उड़द की दाल और लोहे की कील अर्पित करें या दान करें। इससे शनि दोष में कमी आती है।

शनि बीज मंत्र का जाप
इस दिन “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 30 माला जाप करें। मान्यता है कि इससे जीवन के दुखों का नाश होता है और शनि की कृपा प्राप्त होती है।

सरसों तेल का विशेष उपाय
लोहे के पात्र में सरसों का तेल भरें और उसमें लाल फूल डालकर घर के मध्य भाग (ब्रह्म स्थान) में रखें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता बढ़ती है।

पीपल वृक्ष की पूजा
शनि प्रदोष के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें। शाम को पीपल के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

हनुमान जी की आराधना
शनिवार को हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से शनि दोष शांत होते हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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शनि प्रदोष पूजा विधि 
प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
प्रदोष काल में भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें।
शिव मंत्र और शनि मंत्र का जाप करें।
दीपक जलाकर आरती करें और जरूरतमंदों को दान दें।

शनि प्रदोष व्रत 2026 ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। यदि आप साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव से परेशान हैं, तो इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर शिव-शनि की आराधना करें। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए उपायों से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

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