'फ्लाइट हाईजैक' वाला गलत ट्वीट पड़ा भारी, दिल्ली हाई कोर्ट ने यात्री पर लगाया ₹30,000 का जुर्माना

Edited By Updated: 07 Aug, 2026 08:20 PM

erroneous flight hijack tweet proves costly delhi high court imposes 30 000

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फ्लाइट के "हाईजैक" होने संबंधी गलत जानकारी साझा करने वाले एक यात्री पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फ्लाइट के "हाईजैक" होने संबंधी गलत जानकारी साझा करने वाले एक यात्री पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने माना कि मामले में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और यात्री ने अपनी गलती जल्द सुधार ली थी। इसी आधार पर उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी गई, लेकिन यह शर्त रखी गई कि वह दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि दिल्ली हाई कोर्ट कर्मचारी कल्याण कोष में जमा करेगा।

पैसेंजर की याचिका पर सुनवाई

मामले की सुनवाई जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने की। याचिकाकर्ता मोती सिंह राठौर ने अदालत से अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला वर्ष 2023 का है। दुबई से जयपुर जा रही स्पाइसजेट की एक उड़ान खराब मौसम के कारण दिल्ली डायवर्ट कर दी गई थी, जिससे यात्रियों को करीब छह घंटे की देरी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री को टैग किया और गलती से लिख दिया कि "दुबई से जयपुर जाने वाली फ्लाइट हाईजैक हो गई है।"

सार्वजनिक रूप से मांगी थी माफी

यात्री को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने एक घंटे के भीतर पोस्ट को सुधारते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उन्हें अंग्रेज़ी भाषा का सीमित ज्ञान है और गुस्से में उन्होंने "हाईजैक" शब्द का गलत इस्तेमाल कर दिया। उनका कहना था कि फ्लाइट केवल देरी से चल रही थी, उसका हाईजैक नहीं हुआ था। इस ट्वीट के बाद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इनमें सार्वजनिक अशांति फैलाने वाली अफवाह, गलत तरीके से रोकने और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं शामिल थीं।

देरी के कारण गुस्से में पोस्ट

सुनवाई के दौरान यात्री के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का उद्देश्य किसी तरह की दहशत फैलाना नहीं था। उन्होंने कहा कि भाषा की सीमित जानकारी और फ्लाइट में हुई देरी के कारण हुई झुंझलाहट की वजह से यह गलती हुई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि "हाईजैक" जैसे संवेदनशील शब्द का इस्तेमाल बेहद गंभीर परिणाम पैदा कर सकता था। हालांकि इस मामले में कोई वास्तविक नुकसान या अप्रिय घटना नहीं हुई। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसकी उम्र कम है, अंग्रेज़ी भाषा पर उसकी पकड़ सीमित है और उसने अपनी गलती तुरंत स्वीकार करते हुए उसे सुधार लिया था।

कोर्ट ने पैसेंजर को दी चेतावनी

हाई कोर्ट ने 4 अगस्त के आदेश में एफआईआर रद्द कर दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर इस तरह की गलत और भ्रामक जानकारी साझा करना बेहद गंभीर मामला है। अदालत ने जुर्माने के साथ याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचने की भी अप्रत्यक्ष चेतावनी दी।  

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