हर भारतीय को स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 04:47 PM

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि हर भारतीय को देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए। राधाकृष्णन ने बोस के निडर नेतृत्व, अदम्य साहस और...

नेशनल डेस्क: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि हर भारतीय को देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए। राधाकृष्णन ने बोस के निडर नेतृत्व, अदम्य साहस और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन ‘पराक्रम' के सच्चे सार का प्रतीक है, जो भावी पीढ़ियों को साहस, बलिदान एवं राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने की प्रेरणा देता आय़ा है।

उपराष्ट्रपति शुक्रवार को ओडिशा की अपनी पहली यात्रा पर सुबह भुवनेश्वर पहुंचे और कटक में बोस की जयंती पर आयोजित पराक्रम दिवस समारोह में हिस्सा लिया। उड़िया बाजार में आयोजित कार्यक्रम में दिखाए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वीडियो संदेश का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2021 में बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस' घोषित करके उन्हें उचित सम्मान दिया। राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘विचार में मतभेद हो सकते हैं, आजादी के लिए लड़ाई के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन हर भारतीय को महान बलिदानों को मान्यता देनी चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए।''

उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया था। उन्होंने इसे भारत के महान सपूत बोस को सम्मानित करने वाला कदम बताया। राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘मोदी की निर्णायक कार्रवाई और राष्ट्र की सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ‘पराक्रम' की भावना को व्यक्त करती है, जो साहस और दृढ़ संकल्प की भावना है।''

उन्होंने कहा कि बोस की ओर से 'फॉरवर्ड ब्लॉक' का गठन महात्मा गांधी के खिलाफ नहीं था, बल्कि औपनिवेशिक शासन से लड़ने के लिए एक अलग दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता था। राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘जब वे (बोस) कटक पहुंचे, तो हजारों लोग आए। उस समय महात्मा गांधी को हर कोई जानता था और वे एक निर्विवाद नेता थे। उस निर्विवाद नेता पर केवल एक व्यक्ति ने सवाल उठाए और वह थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस। इससे पता चलता है कि वह कितने महान नेता थे।''

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘पराक्रम' केवल नेताजी की स्मृति नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए साहसपूर्वक कार्य करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन के खिलाफ बोस का संघर्ष आज भी भारतीयों में देशभक्ति की भावना को जागृत करता है। राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘मेरे हृदय में देशभक्ति की पहली चिंगारी सुभाष चंद्र बोस के जीवन इतिहास को पढ़ने के बाद ही पैदा हुई। नेताजी वहां आज भी मौजूद हैं, जहां साहस भय पर विजय पाता है और जहां कर्तव्य स्वार्थ से ऊपर उठता है।''

बाद में उपराष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राधाकृष्णन ने नागरिकों से नेताजी के मजबूत, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राष्ट्र के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए सामूहिक रूप से ‘विकसित भारत 2047' की दिशा में काम करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।'' इससे पहले, उपराष्ट्रपति ने कटक में बोस के जन्मस्थान पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी भी मौजूद थे। राधाकृष्णन ने कटक में एक डाक टिकट संग्रह दीर्घा और जिला संस्कृति भवन का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कटक में पराक्रम दिवस समारोह के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी मायाधर मल्लिक और विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) बीएस सिंह देव को भी सम्मानित किया। 

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