चीन सीमा मुद्दे, पाक आतंक समाधान को हल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा भारत : एस जयशंकर

Edited By Updated: 11 Jun, 2024 01:38 PM

focus will be to resolve remaining issues along border eam on india china ties

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत, चीन के साथ सीमा पर शेष मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय से जारी सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में काफी तनाव आया है।

नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत, चीन के साथ सीमा पर शेष मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय से जारी सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में काफी तनाव आया है। विदेश मंत्री के रूप में कामकाज संभालने के कुछ ही समय बाद जयशंकर ने पाकिस्तान से होने वाले सीमापार आतंकवाद का जिक्र किया और कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए प्रयास किये जाएंगे।

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भारत प्रथम और वसुधैव कुटुम्बकम दो दिशानिर्देशक सिद्धांत
राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी और निर्मला सीतारमण सहित भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं को पिछली सरकार में संभाले गए मंत्रालयों की जिम्मेदारी पुन: सौंपी गई है और उनमें जयशंकर (69) भी हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि ‘भारत प्रथम' और ‘वसुधैव कुटुम्बकम' भारतीय विदेश नीति के दो दिशानिर्देशक सिद्धांत होंगे। चीन के साथ संबंधों पर जयशंकर ने कहा कि उस देश की सीमा पर कुछ मुद्दे बने हुए हैं और उन्हें सुलझाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘चीन को लेकर हमारा ध्यान इस बात पर होगा कि बाकी मुद्दों को कैसे सुलझाया जाए।''

पाकिस्तान के साथ हमारा आतंकवाद का मुद्दा
भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच मई 2020 से गतिरोध जारी है और सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। हालांकि, दोनों पक्ष कई टकराव वाले बिंदुओं से पीछे हट गए हैं। इस्लामाबाद को लेकर नई सरकार के रुख के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने प्रमुख मुद्दे के रूप में सीमापार आतंकवाद के लिए पाकिस्तान के समर्थन को चिह्नित किया। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के साथ हमारा आतंकवाद का मुद्दा है - सीमा पार आतंकवाद - हम इसका समाधान कैसे ढूंढ़ सकते हैं, यह एक अच्छे पड़ोसी की नीति नहीं हो सकती।''

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विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी मेेरे लिए सौभाग्य की बात है 
विदेश मंत्री ने सरकार की विदेश नीति की प्राथमिकताओं के बारे में भी संक्षिप्त वार्ता की। उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य की ओर देखते हुए, मैं निश्चित रूप से सोचता हूं कि प्रधानमंत्री ने हमें जो दो सिद्धांत दिए हैं - 'भारत प्रथम' और 'वसुधैव कुटुम्बकम' - ये भारतीय विदेश नीति के दो मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी को पूरा विश्वास है कि यह हमें 'विश्व बंधु' के रूप में स्थापित करेगा - एक ऐसा देश जो बहुत अशांत दुनिया में है, एक बहुत विभाजित दुनिया में है, संघर्षों और तनावों की दुनिया में है। यह वास्तव में हमें एक ऐसे देश के रूप में स्थापित करेगा जिस पर कई लोगों का विश्वास है, जिसकी प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ेगा, जिसके हितों को आगे बढ़ाया जाएगा।''

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जयशंकर ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने पिछली सरकार में अत्यंत अच्छा काम किया है और मंत्रालय में एक बार फिर काम करना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए यह बहुत सम्मान और सौभाग्य की बात है कि मुझे एक बार फिर विदेश मंत्रालय का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। पिछले कार्यकाल में इस मंत्रालय ने वास्तव में असाधारण प्रदर्शन किया था।''

 

 

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