Edited By Tanuja,Updated: 03 Aug, 2026 07:20 PM

FSSAI ने कृत्रिम और नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर के इस्तेमाल के आरोप में Royal Challenge, Antiquity Blue, Bagpiper, Old Cask और Old Monk के कुछ वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। नियामक ने इन्हें "सब-स्टैंडर्ड" बताया है, जबकि शराब उद्योग का कहना है कि...
International Desk: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब उद्योग पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कुछ लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांडों के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। नियामक का आरोप है कि इन उत्पादों में स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए कृत्रिम (Artificial) या नेचर-आइडेंटिकल (Nature-Identical) फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया, जिससे ये भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार 'सब-स्टैंडर्ड' (Sub-standard) श्रेणी में आते हैं। FSSAI के अनुसार, जांच के दौरान पाया गया कि कुछ निर्माता व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर और रम में रम फ्लेवर मिला रहे थे। नियामक का कहना है कि भारतीय नियम प्राकृतिक फ्लेवरिंग की अनुमति देते हैं, लेकिन शराब में उसी शराब का कृत्रिम फ्लेवर मिलाने की कोई मान्यता प्राप्त विनिर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Practice) नहीं है।
इन ब्रांडों के उत्पाद हुए प्रभावित
FSSAI की कार्रवाई कुछ विशेष उत्पादन इकाइयों (Manufacturing Facilities) में तैयार किए गए उत्पादों पर लागू की गई है। इनमें शामिल हैं:
- United Spirits (Diageo India) के Royal Challenge Whisky और Antiquity Blue Whisky के कुछ वेरिएंट।
- Inbrew Beverages की Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum।
- Mohan Rocky Springwater (महाराष्ट्र) द्वारा निर्मित Old Monk Rum के तीन वेरिएंट।
नियामक का कहना है कि इस तरह की फ्लेवरिंग से निर्माता लंबे समय तक चलने वाली प्राकृतिक परिपक्वता (Maturation) प्रक्रिया से बच सकते हैं या फिर गुड़ (Molasses), माल्ट (Malt) और अंगूर जैसे प्राकृतिक कच्चे माल का सीमित उपयोग कर सकते हैं। इसलिए ऐसे उत्पादों को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं माना गया।
शराब उद्योग की प्रतिक्रिया
उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कंपनियों को विश्वास था कि उनकी फ्लेवरिंग प्रक्रिया भारतीय नियमों के अनुरूप है। उन्होंने FSSAI के इस फैसले पर चिंता जताई है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि बिक्री पर रोक केवल उन विशेष फैक्ट्रियों में बने उत्पादों तक सीमित रहेगी या संबंधित ब्रांडों के सभी वेरिएंट्स पर लागू होगी। हाल के महीनों में FSSAI खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योग पर लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। इससे पहले प्राधिकरण ने अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों को "एनर्जी ड्रिंक" के रूप में प्रचारित करने पर भी सख्ती दिखाई थी।