UPI फ्रॉड रोकने के लिए बैंकों का बड़ा प्लान, ट्रांजैक्शन से पहले आएगा 'YES/NO' का अलर्ट

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 05:07 PM

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UPI Transaction: देश में यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड और फर्जी रिफंड/कस्टमर केयर स्कैम के मामले भी तेजी से इजाफा हो रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए बैंकों ने नेशनल पेमेंट्स

UPI Transaction: देश में यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड और फर्जी रिफंड/कस्टमर केयर स्कैम के मामले भी तेजी से इजाफा हो रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए बैंकों ने नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने एक नया सुरक्षा मॉडल प्रस्तावित किया है। इसके तहत संदिग्ध या हाई-रिस्क UPI ट्रांसफर्स (High-Risk UPI Transfers) से पहले यूजर की स्क्रीन पर ‘YES/NO’ (हां/नहीं) का कंफर्मेशन प्रॉम्प्ट (Pop-up Alert) दिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों को अंतिम पुष्टि का मौका देकर धोखाधड़ी की घटनाओं को कम करना है।

फ्रॉड रोकने का नया प्लान

नई व्यवस्था के तहत, पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन में पाने वाले के अकाउंट में पैसे जमा होने से पहले पेमेंट करने वाले से मंजूरी मांगी जाएगी। अगर ग्राहक YES (हां) कहता है, तो पेमेंट कुछ ही सैकेंड में हो जाएगा। अगर वह NO (नहीं) कहता है, तो ट्रांजैक्शन कैंसल हो जाएगा। यदि ग्राहक कोई विकल्प नहीं चुनता, तो पेमेंट हो जाएगा लेकिन राशि प्राप्तकर्ता के खाते में एक घंटे बाद पहुंचेगी।

किन ट्रांजैक्शनों पर दिख सकता है अलर्ट?

बैंकों का सुझाव है कि यह अलर्ट सभी ट्रांजैक्शनों पर लागू न हो, बल्कि केवल हाई-रिस्क मामलों में दिखाया जाए। इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • देर रात या असामान्य समय पर किया गया भुगतान।
  • ऐसे व्यक्ति को पहली बार पैसे भेजना, जिसके साथ पहले कभी लेन-देन नहीं हुआ हो।
  • हाल ही में खोले गए बैंक खाते में भुगतान।
  • अन्य संदिग्ध गतिविधियां, जिन्हें सिस्टम जोखिमपूर्ण मानता हो।

एक घंटे की देरी पर बैंकों की चिंता

RBI के चर्चा पत्र में कुछ मामलों में भुगतान की राशि प्राप्तकर्ता के खाते में एक घंटे की देरी से जमा करने का सुझाव भी दिया गया है। हालांकि, कई बैंकों का मानना है कि सभी ट्रांजैक्शनों में ऐसी देरी से डिजिटल भुगतान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है और लोग फिर से नकद लेन-देन की ओर लौट सकते हैं। इसी वजह से बैंक ‘YES/NO’ अलर्ट को अधिक व्यावहारिक विकल्प मान रहे हैं।

लगातार बढ़ रहे हैं डिजिटल फ्रॉड

बैंकिंग क्षेत्र के अनुसार, डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भी तेज वृद्धि हुई है।

  • 2021 में डिजिटल फ्रॉड के करीब 2.6 लाख मामले दर्ज हुए थे।
  • 2025 तक यह संख्या बढ़कर 28 लाख पहुंच गई।
  • इसी अवधि में धोखाधड़ी की राशि 551 करोड़ रुपए से बढ़कर 22,931 करोड़ रुपए हो गई।

अभी अंतिम फैसला नहीं

फिलहाल यह केवल बैंकों की ओर से दिया गया एक प्रस्ताव है। RBI और NPCI इस पर विचार कर रहे हैं। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में UPI ऐप्स में यह सुरक्षा सुविधा जोड़ी जा सकती है, जिससे संदिग्ध ट्रांजैक्शनों के दौरान ग्राहकों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।
 
 

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