Edited By Anu Malhotra,Updated: 30 Jul, 2026 09:47 AM

Price Changes From August 1: अगस्त महीने की शुरूआत होते ही आम आदमी को बड़ा झटका लगने वाला है। दरअसल, 1 अगस्त से पूरे भारत में तेल, साबुन, TV, फ्रिज और कारें महंगी हो जाएंगी। इसका कारण इनपुट कॉस्ट बढ़ना और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटें है जिसके चलते...
Price Changes From August 1: अगस्त महीने की शुरूआत होते ही आम आदमी को बड़ा झटका लगने वाला है। दरअसल, 1 अगस्त से पूरे भारत में तेल, साबुन, TV, फ्रिज और कारें महंगी हो जाएंगी। इसका कारण इनपुट कॉस्ट बढ़ना और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटें है जिसके चलते FMCG प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कारों और कपड़ों की कीमतें बढ़ने वाली हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई इंडस्ट्रीज़ प्रोडक्शन और इम्पोर्ट की लागत बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
महंगे होंगे FMCG प्रोडक्ट्स
बता दें कि रोजमर्रा की चीज़ें जैसे चाय, बालों का तेल, साबुन और अन्य तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर गुड्स (FMCG) अगले महीने 6% से 8% तक महंगे हो सकते हैं। ये प्रोडक्ट्स रोज इस्तेमाल होते हैं, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का असर ज्यादातर घरों पर पड़ने की संभावना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स आईटम्स होंगे महंगे
रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और टेलीविज़न जैसे घरेलू उपकरणों की कीमतों में 4% से 6% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। स्मार्टफोन भी महंगे हो सकते हैं क्योंकि हाल के महीनों में मेमोरी चिप की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है।
नई कार खरीदना महंगा
कीमतों में बढ़ोतरी का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी पड़ेगा। मारुति सुज़ुकी ने घोषणा की है कि वह अगस्त से अपनी गाड़ियों की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करेगी। होंडा कार्स और मर्सिडीज़-बेंज़ समेत अन्य कार निर्माता भी आने वाले हफ़्तों में कीमतें बढ़ाने की योजना बना रहे हैं क्योंकि वे बढ़ी हुई इनपुट लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रहे हैं।
क्यों बढ़ रही कीमतें
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके मुख्य कारण ग्लोबल इकोनॉमिक और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम हैं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और पाम ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे पैकेजिंग मटीरियल महंगा हो गया है। वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव ने भी ग्लोबल सप्लाई चेन को बाधित किया है। ज़्यादा शिपिंग लागत और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव ने इम्पोर्ट किए गए कच्चे माल को महंगा कर दिया है, जिससे कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग का खर्च बढ़ गया है।
कई कंपनियों का कहना है कि वे एक साथ कीमतें नहीं बढ़ाएंगी। वे पहले प्रीमियम और बड़े प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं, जबकि छोटे पैक बाद में महंगे हो सकते हैं। कंपनियों का यह भी कहना है कि उन्होंने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद उठाया था। अब वे सितंबर तिमाही के दौरान कीमतों में 2% से 5% तक की बढ़ोतरी करके बाकी लागत वसूलने की योजना बना रही हैं। कपड़ा कंपनियां भी त्योहारों के मौसम से पहले रेडीमेड कपड़ों की कीमतें बढ़ा सकती है।
इकोनॉमिक ग्रोथ पर महंगाई का असर
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, बढ़ती कीमतों का असर भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। एक ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत की GDP ग्रोथ पहले के 6.6% के अनुमान से धीमी हो सकती है। महंगाई दर के भी 5.4% के बेसलाइन अनुमान से ऊपर रहने की उम्मीद है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बास्केट में खाने-पीने की चीज़ों की हिस्सेदारी 36.8% है, जिसका मतलब है कि खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर घरों के बजट पर असर डाल सकती हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि भारत की 43% से ज़्यादा वर्कफोर्स खेती पर निर्भर है।
मिडिल-क्लास परिवारों को झटका
बढ़ती कीमतों का असर सबसे पहले मिडिल-क्लास परिवारों पर पड़ेगा। रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतें लगातार बढ़ने के कारण, कई परिवारों के लिए अपने महीने का बजट संभालना मुश्किल हो सकता है। सुबह की चाय से लेकर नई कार खरीदने तक, कई ज़रूरी खर्च बढ़ने की उम्मीद है। जैसे-जैसे त्योहारों का मौसम नज़दीक आ रहा है, कई मिडिल-क्लास परिवारों के लिए घर के खर्चों में तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।