तमिलनाडु की सियासत में बड़ा धमाका: थिरुमावलवन का दावा—'विजय को सत्ता से दूर रखने की बन रहा था सीक्रेट प्लान

Edited By Updated: 18 May, 2026 12:41 PM

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तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने बीते दिनों राज्य के सीएम के पद का संभाला था। विजय के सीएम बनने के बाद एक हैरानीजनक खुलासा हुआ है।  चुनाव के बाद सरकार गठन के दौरान विजय को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने से रोकने के लिए DMK और AIADMK ने...

नेशनल डेस्क : तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने बीते दिनों राज्य के सीएम के पद का संभाला था। विजय के सीएम बनने के बाद एक हैरानीजनक खुलासा हुआ है।  चुनाव के बाद सरकार गठन के दौरान विजय को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने से रोकने के लिए DMK और AIADMK ने मिलकर एक गुप्त रणनीति तैयार की थी। विदुथलाई चिरुथाईगल कात्ची (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने दावा किया है कि थलापति विजय का रास्ता रोकने के लिए उन्हें CM पद तक की पेशकश कर दी गई थी।

बहुमत के ड्रामे के बीच पर्दे के पीछे का खेल

एक इंटरव्यू में वीसीके (VCK) प्रमुख थिरुमावलवन ने साफ किया है कि जिस समय सरकार बनने को लेकर सस्पेंस चल रहा था उस समय दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों के बीच गुप्त बातचीत चल रही थी। उस समय हालात ऐसे थे कि जब विजय की पार्टी 'टीवीके' सबसे बड़े दल के रूप में तो उभरी, लेकिन पूर्ण बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई थी।

थिरुमावलवन ने उन दिनों की इनसाइड स्टोरी बताते हुए किए दो बड़े खुलासे

7 मई का घटनाक्रम: वीसीके प्रमुख के मुताबिक, उन्हें सीएम एम.के. स्टालिन से मिलने का बुलावा आया। बैठक में ऐसा प्रस्ताव रखा गया था कि AIADMK चाहती है कि सब मिलकर एडापड्डी पलानीस्वामी (EPS) को CM बनाएं। इस पर वीसीके और वामपंथी दलों ने इस पर असहमति जताई थीं। अगर ऐसा होता तो इससे DMK का भविष्य खतरे में पड़ सकता था।

8 मई को सीएम पद का ऑफर: इस घटना के दूसरे दिन यानि कि 8 मई को  एक हैरान करने वाला फॉर्मूला सामने आया। इस नए प्रस्ताव के तहत वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री और ई. पलानीस्वामी को उपमुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई। थिरुमावलवन ने कहा, "मैंने इसे मजाक में उड़ा दिया, क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में ऐसा होना व्यावहारिक रूप से असंभव था।"

समर्थन के बाद भी आते रहे ऑफर

इस पूरी घटना के बाद VCK प्रमुख ने दावा किया कि जब उन्होंने थलापति विजय की पार्टी 'टीवीके' को अपना समर्थन पत्र देने के बाद भी उन्हें पार्टी बदलने के लिए सीएम पद के लिए ऑफर मिलते रहे। हालांकि, वीसीके अपने फैसले पर टिकी रही, जिससे टीवीके ने बहुमत का आंकड़ा पार किया और थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।

 

 

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