Edited By Sahil Kumar,Updated: 04 Apr, 2026 08:40 PM

मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। Morgan Stanley के अनुसार, मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों में कटौती की कम होती उम्मीद और शेयर बाजार में गिरावट के कारण बढ़े ‘मार्जिन...
नेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में तेज गिरावट ने बाजार को हैरान कर दिया है। आमतौर पर युद्ध जैसी स्थिति में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसके दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार ट्रेंड उल्टा देखने को मिल रहा है। बीते कुछ हफ्तों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच सोने की कीमतों में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद गोल्ड की यह कमजोरी निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही है। इस पर प्रमुख वित्तीय संस्था Morgan Stanley ने विस्तृत विश्लेषण पेश किया है।
जानकारी के अनुसार, फरवरी के अंत में जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा, तो बाजार खुलते ही सोने की कीमतों में तेज उछाल आया था। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी और मार्च के अंत तक कीमतों में लगातार गिरावट शुरू हो गई।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती
विश्लेषकों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव आता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी
इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक महंगाई की आशंका बढ़ा दी है। ऐसे में अमेरिका समेत दुनिया के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती से बच रहे हैं। ऊंची ब्याज दरों का माहौल सोने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, जिससे इसकी कीमतों पर असर पड़ रहा है।
बाजार में नकदी की कमी
तीसरा बड़ा कारण बाजार में नकदी की कमी है। शेयर बाजार में गिरावट के चलते निवेशकों पर ‘मार्जिन कॉल’ का दबाव बढ़ा है। ऐसे में निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना बेच रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी और कीमतों में और गिरावट आई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डॉलर मजबूत रहेगा और ब्याज दरों में नरमी के संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने की कीमतों में दबाव बना रह सकता है।