Edited By Sahil Kumar,Updated: 11 Feb, 2026 07:12 PM
सोना और चांदी की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच नई रिपोर्ट में सोने के मिड और लॉन्ग टर्म आउटलुक को मजबूत बताया गया है। रिकॉर्ड स्तर से गिरावट के बावजूद कीमतें 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बनी हुई हैं। गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश और केंद्रीय...
नेशनल डेस्कः सोना और चांदी की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। पहले तेज गिरावट और फिर अचानक आई मजबूती के बाद मंगलवार को दोनों कीमती धातुओं में दोबारा नरमी देखी गई। इस अस्थिरता के बीच बाजार विशेषज्ञों की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें खासकर सोने की कीमतों को लेकर सकारात्मक रुख जताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने का दीर्घकालिक रुझान मजबूत बना हुआ है और इसमें चीन की भूमिका अहम बताई गई है। विश्लेषकों का मानना है कि मुनाफावसूली का दौर थमने के बाद बाजार का ध्यान फिर से मजबूत मांग के कारकों पर जाएगा, जिससे सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है।
फिसलने के बाद भी मजबूती बरकरार
जनवरी 2026 के अंत तक सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। 29 जनवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के शिखर पर पहुंच गया था। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें पहली बार 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई थीं। हालांकि इसके बाद मुनाफावसूली और वैश्विक परिस्थितियों में नरमी के चलते कीमतों में गिरावट आई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सोने को मजबूत आधार मिल चुका है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स की 10 फरवरी को जारी गोल्ड रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में भारी उतार-चढ़ाव के कारण सोने की लगभग आधी तेजी खत्म हो गई। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 5,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर टिके रहने में सफल रहीं। जनवरी के दौरान लंदन स्पॉट मार्केट में सोना 5,594 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था, हालांकि महीने के अंत में बिकवाली हावी रही। भू-राजनीतिक तनाव में कमी भी गिरावट का एक प्रमुख कारण रही। फिर भी LBMA और COMEX बाजारों में सोना 5,000 डॉलर से ऊपर बना रहा और मासिक आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
बढ़ती मांग दे रही है सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक मांग सोने की कीमतों को मजबूत बनाए हुए है। वर्ष 2025 में सोने की कुल वैश्विक मांग पहली बार 5,000 टन से अधिक दर्ज की गई, जिससे इसका कुल बाजार मूल्य 555 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक है। निवेश के रूप में सोने की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में 801 टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो अब तक की दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। इसके अलावा, सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग 12 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो निवेशकों के सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने पर बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
ETF निवेश में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
2026 की शुरुआत में भी निवेश का रुझान जारी रहा। जनवरी महीने में गोल्ड ETF में 19 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे मजबूत मासिक प्रवाह माना जा रहा है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर ETF के तहत प्रबंधित संपत्ति बढ़कर 669 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। कुल वैश्विक भंडार 4,145 टन के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गया है, जो आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की सुरक्षा की भावना को दर्शाता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीद और चीन का असर
सोने की कीमतों को सहारा देने में केंद्रीय बैंकों की भूमिका भी अहम रही है। वर्ष 2025 में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध खरीद 328 टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन मांग का स्तर मजबूत बना हुआ है। खासकर चीन का योगदान उल्लेखनीय रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने जनवरी में लगातार 15वें महीने सोने की खरीद जारी रखी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को स्थिरता मिली।
आगे क्या होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, निकट अवधि में सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं, लेकिन मध्यम और दीर्घकाल में तेजी की संभावना बनी हुई है। यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तो अल्पकालिक दबाव संभव है, लेकिन ETF में मजबूत निवेश और केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी सोने के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। विश्लेषकों का मानना है कि मुनाफावसूली का दौर थमने के बाद बाजार का ध्यान फिर से मजबूत मांग के कारकों पर जाएगा, जिससे सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है।