Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Feb, 2026 02:30 PM

रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोना और चांदी की कीमतों में फिलहाल ठहराव देखने को मिल रहा है। हालिया तेज गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह गिरावट खरीदारी का सही मौका है या अभी और कमजोरी आ सकती है?
नेशनल डेस्क: रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोना और चांदी की कीमतों में फिलहाल ठहराव देखने को मिल रहा है। हालिया तेज गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह गिरावट खरीदारी का सही मौका है या अभी और कमजोरी आ सकती है?
केंद्रीय बजट 2026 के बाद बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बीते हफ्ते सोना और चांदी ने 1980 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की। भारतीय बाजार में सोना जहां 10 ग्राम के हिसाब से करीब 1.80 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर से फिसलकर लगभग 1.49 लाख रुपये पर आ गया, वहीं चांदी 4.20 लाख रुपये प्रति किलो से गिरकर करीब 2.91 लाख रुपये तक पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव साफ नजर आया। ग्लोबल मार्केट में सोना गिरकर करीब 4,864 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी फिसलकर लगभग 84.66 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी।
सोना-चांदी क्यों गिरे?
कीमतों में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली मानी जा रही है। लंबे समय से जारी तेजी के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी करने वाले निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों पर दबाव बना। हालांकि, इससे कीमती धातुओं के लंबे समय के आउटलुक पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।
यह करेक्शन सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस से फिसलकर 5,160–5,320 डॉलर के दायरे में आ गया, जबकि चांदी 121 डॉलर से घटकर 108–111 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई।
निचले स्तरों पर लौटी खरीदारी
तेज गिरावट के बावजूद निचले स्तरों पर मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में सोना 1.57 लाख से 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच मजबूत सपोर्ट बना रहा है, जबकि चांदी 3.55–3.60 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास टिकती दिख रही है।
गौरतलब है कि पिछले साल के बजट में सोना और चांदी पर आयात शुल्क करीब 15 प्रतिशत से घटाकर लगभग 6 प्रतिशत कर दिया गया था, ताकि तस्करी पर लगाम लगाई जा सके और घरेलू कीमतों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा सके। इस साल भी शुल्क में बदलाव की अटकलों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई, हालांकि फिलहाल कस्टम ड्यूटी में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं किया गया है।
क्या अभी खरीदारी सही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट मजबूत तेजी के बाद सामान्य करेक्शन है, न कि किसी बड़ी गिरावट की शुरुआत। निवेशकों की मांग अब भी बनी हुई है और हर गिरावट पर खरीदारी सामने आ रही है, जिससे कीमतों को सहारा मिल रहा है। हालांकि, अल्पकाल में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सलाह है कि एकमुश्त निवेश के बजाय गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। वहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कीमतों में तेज हलचल जारी रह सकती है।