Edited By Tanuja,Updated: 02 Jun, 2026 12:50 PM

गूगल की रिसर्च पहल Debug अमेरिका में 3.2 करोड़ लैब में तैयार किए गए नर मच्छरों को छोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इन मच्छरों में एक विशेष बैक्टीरिया होगा, जिससे मादा मच्छरों के अंडे नहीं फूटेंगे और समय के साथ मच्छरों की आबादी घटेगी, जिससे...
International Desk: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ एक अनोखा प्रयोग करने जा रही है। कंपनी की रिसर्च परियोजना Debug अमेरिका के फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में अगले दो वर्षों के दौरान करीब 3.2 करोड़ लैब में तैयार किए गए नर मच्छरों को छोड़ने की योजना बना रही है।
कैसे काम करेगा यह प्रयोग?
गूगल के वैज्ञानिक नर मच्छरों को Wolbachia pipientis नामक विशेष बैक्टीरिया से संक्रमित करेंगे। जब ये नर मच्छर जंगली मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करेंगे तो अंडे विकसित नहीं हो पाएंगे। नई मच्छर आबादी पैदा नहीं होगी। धीरे-धीरे मच्छरों की संख्या कम हो जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ मादा मच्छर ही इंसानों को काटती हैं, इसलिए छोड़े जाने वाले नर मच्छर लोगों को नहीं काटेंगे।
दो चरणों में छोड़े जाएंगे मच्छर
योजना के अनुसार पहले वर्ष 1.6 करोड़ नर मच्छर छोड़े जाएंगे। दूसरे वर्ष फिर 1.6 करोड़ मच्छर छोड़े जाएंगे। कुल संख्या 3.2 करोड़ होगी। फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) कर रही है। बता दें कि कीट नियंत्रण के लिए बांझ या निष्क्रिय कीट छोड़ने की तकनीक नई नहीं है। इसका उपयोग पहले भी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने में, पशुओं पर हमला करने वाली कुछ मक्खियों की आबादी घटाने में किया जा चुका है।
विशेषज्ञ इसे रासायनिक कीटनाशकों का अपेक्षाकृत सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प मानते हैं।
क्यों जरूरी है यह प्रयोग?
दुनिया भर में मच्छर कई खतरनाक बीमारियां फैलाते हैं, जिनमें डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस, चिकनगुनिया, येलो फीवर शामिल हैं । हर साल लाखों लोग इन बीमारियों से प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मच्छरों की संख्या नियंत्रित की जा सके तो इन बीमारियों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
भारत को होगा फायदा
भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हैं। यदि गूगल का यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में ऐसी तकनीक भारत समेत कई देशों में अपनाई जा सकती है, जिससे मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।