Edited By Radhika,Updated: 17 Apr, 2026 12:57 PM

केंद्र सरकार द्वारा संसद में तीन बड़े बिल पेश गए हैं। इन बिलों को पास करने के लिए सरकार एक योजना बना रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस प्लान के तहत rule 66 को निलंबित करने पर विचार कर सकती है।
Lok Sabha Rule 66: केंद्र सरकार द्वारा संसद में तीन बड़े बिल पेश गए हैं। इन बिलों को पास करने के लिए सरकार एक योजना बना रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस प्लान के तहत rule 66 को निलंबित करने पर विचार कर सकती है। डिटेल में जानते हैं इसके बारे में-
क्या कहता है नियम 66?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुल 66 में इस बात पर निर्णय लिया जाता है कि लोकसभा में निर्भर या फिर संबंधित बिलों पर कैसे विचार किया जाए। इसके अलावा जिस बिल पर चर्चा होने वाली है और उस पर कोई दूसरा बिल भी निर्भर करता है तो उसे तब तक पास नहीं किया जा सकता, जबतक कि मुख्य बिल को सदन की मंजूरी न मिले। आसान शब्दों में कहे तो दूसरे बिल के पास होने से पहले पहला बिल पास होना जरुरी है।
नियम को निलंबित करने की आवश्यकता क्यों?
सरकार का मुख्य उद्देश्य Legislative Delay को कम करना है। सरकार चाहती है कि निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को एक 'पैकेज' के रूप में एक साथ पेश और पारित किया जाए:
1. संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026
2. परिसीमन बिल
3. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल
नियम 66 हटने से इन तीनों पर एक साथ बहस और वोटिंग का रास्ता साफ हो जाएगा।
2029 का लक्ष्य और महिला आरक्षण
इस पूरी प्लान का सबसे बड़ा केंद्र 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' है। इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है।महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों का नए सिरे से निर्धारण जरुरी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के अगले आम चुनाव तक नई आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाए। नियम 66 को निलंबित करने से समय की बचत होगी और यह सुनिश्चित होगा कि कानूनी प्रक्रिया चुनावी समय सीमा के भीतर पूरी हो।