CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज; दोनो सदनों के स्पीकर ने ठुकराया प्रस्ताव

Edited By Updated: 06 Apr, 2026 10:05 PM

impeachment motion against cec gyanesh kumar rejected

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस को सोमवार को अस्वीकार कर दिया। लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय ने यह जानकारी...

नेशनल डेस्कः राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस को सोमवार को अस्वीकार कर दिया। लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय ने यह जानकारी दी। लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 विपक्षी सदस्यों ने बीते 12 मार्च को दोनों सदनों में कुमार के खिलाफ नोटिस सौंपा था।

लोकसभा सचिवालय ने कहा कि भारत के संविधान (अनुच्छेद 324(5) व 124(4)) और मुख्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत धारा 11(2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत लोकसभा के 130 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित दिनांक 12 मार्च, 2026 के एक प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी।

सचिवालय ने कहा, "प्रस्ताव के नोटिस पर उचित विचार-विमर्श करने और उसमें शामिल सभी प्रासंगिक पहलुओं और मुद्दों के सावधानीपूर्वक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्रस्ताव के उक्त नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।" राज्यसभा के सभापति राधाकृष्णन ने भी विपक्ष के नोटिस को खारिज कर दिया। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी बुलेटिन में यह जानकारी दी गई।

इसमें कहा गया है कि प्रस्ताव की सूचना पर उचित विचार-विमर्श करने और सावधानीपूर्वक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने के बाद सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। अपने नोटिस में, लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 विपक्षी सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार पर ''कार्यपालिका के इशारे पर काम करने'' का आरोप लगाया था। इसके अलावा, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के माध्यम से लोगों को ''बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने'' का भी आरोप लगाया था। 

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