Edited By Anu Malhotra,Updated: 16 Feb, 2026 11:31 AM

भारतीय रेलवे अब केवल पटरियों का जाल नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की प्रगति का गलियारा बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में रेलवे के कायाकल्प को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया...
नई दिल्ली : भारतीय रेलवे अब केवल पटरियों का जाल नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की प्रगति का गलियारा बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में रेलवे के कायाकल्प को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन विशाल मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। ₹18,509 करोड़ के भारी-भरकम निवेश वाली ये योजनाएं न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाएंगी, बल्कि करोड़ों लोगों के सफर को सुगम और सुरक्षित बनाएंगी।
देश के इन प्रमुख रूटों पर बिछेंगी तीसरी और चौथी लाइन
सरकार का मुख्य फोकस रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करना है। इसके तहत दिल्ली-अंबाला, कसारा-मनमाड और बल्लारी-होसपेटे जैसे व्यस्त रेल खंडों पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी। लगभग 389 किलोमीटर लंबे इस नए ट्रैक विस्तार से दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 महत्वपूर्ण जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इससे स्टेशनों पर ट्रेनों की वेटिंग खत्म होगी और समय की बचत होगी।
PM गति शक्ति: आधुनिक कनेक्टिविटी का नया मंत्र
इन सभी प्रोजेक्ट्स को 'पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान' के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ पटरी बिछाना नहीं, बल्कि रेल, सड़क और जलमार्गों के बीच एक बेहतरीन तालमेल बिठाना है। इस एकीकृत योजना से माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की लॉजिस्टिक लागत में बड़ी कमी आएगी और व्यापार को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
97 लाख आबादी और आस्था के केंद्रों को सीधा लाभ
यह विस्तार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर करीब 3,902 गांवों तक पहुंचेगा, जिससे 97 लाख लोगों की जिंदगी आसान होगी। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन लाइनों को त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, वैष्णो देवी और हम्पी जैसे प्रमुख स्थलों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा रहा है।
बड़ी उपलब्धि: इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 96 मिलियन टन का इजाफा होगा। कोयला, स्टील, सीमेंट और अनाज जैसे जरूरी सामान अब और भी तेजी से गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
रोजगार और आत्मनिर्भर भारत को नई उड़ान
इन निर्माण कार्यों से न केवल हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे, बल्कि स्थानीय उद्योगों को भी संजीवनी मिलेगी। यह कदम 'न्यू इंडिया' के उस संकल्प को दोहराता है जहां आधुनिक तकनीक और बेहतर कनेक्टिविटी ही विकास की असली पहचान है।