Indian Railways News: आधी सीट, पूरा किराया: संसद ने कहा – RAC यात्रियों से पूरा किराया लेना गलत

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 12:25 PM

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भारतीय ट्रेनों में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। अक्सर कन्फर्म टिकट न मिलने पर हमें RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) का सहारा लेना पड़ता है, जहाँ एक ही सीट पर दो लोग बैठकर सफर पूरा करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस...

नेशनल डेस्क: भारतीय ट्रेनों में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। अक्सर कन्फर्म टिकट न मिलने पर हमें RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) का सहारा लेना पड़ता है, जहाँ एक ही सीट पर दो लोग बैठकर सफर पूरा करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस 'आधी सीट' के लिए रेलवे हमसे 'पूरा किराया' वसूलता है। अब संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने इस पुराने ढर्रे पर कड़ा ऐतराज जताया है और रेल मंत्रालय को मुसाफिरों के हक में बड़ा सुझाव दिया है।

जब सीट आधी, तो वसूली पूरी क्यों?

संसदीय समिति ने रेलवे से सीधा सवाल किया है कि जब प्रशासन यात्री को सोने के लिए पूरी बर्थ उपलब्ध नहीं करा पाता, तो उनसे पूरा पैसा लेना कहां तक जायज है? समिति की सिफारिश है कि जो यात्री अपनी सीट दूसरे के साथ साझा करते हैं, उन्हें किराये का एक हिस्सा वापस (Refund) मिलना चाहिए। मौजूदा व्यवस्था में रेलवे एक ही बर्थ को दो लोगों को बेचकर डबल कमाई करता है, जिसे समिति ने अनुचित बताया है।

ऑटोमैटिक रिफंड की तैयारी

पैनल ने सुझाव दिया है कि रेलवे को एक ऐसा पारदर्शी और आधुनिक सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें RAC यात्रियों का रिफंड सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच जाए। यह भी विकल्प दिया गया है कि टिकट बुक करते समय ही ऐसे यात्रियों से कम किराया लिया जाए। समिति ने रेल मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह इस दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाए और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट संसद को सौंपे।

आम आदमी के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत में आपातकाल या आखिरी वक्त पर यात्रा करने वाले लोग वेटिंग से बचने के लिए RAC टिकट लेते हैं। दिन का सफर तो जैसे-तैसे कट जाता है, लेकिन रात में सोने की जगह न होने से बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी होती है। वर्तमान में वेटिंग टिकट रद्द होने पर पैसा वापस मिल जाता है, लेकिन RAC को कन्फर्म मानकर रेलवे पूरा पैसा रख लेता है। अगर यह नया सुझाव लागू होता है, तो ट्रेनों में 'धक्के' खाने वाले मध्यमवर्गीय यात्रियों का सफर न केवल सस्ता होगा, बल्कि उन्हें अपनी जेब के साथ न्याय होता भी महसूस होगा।

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