ईरान में रह रहे भारतीय तुरंत छोड़ें देश, बढ़ते तनाव के बीच भारत ने जारी किया अलर्ट

Edited By Updated: 08 Jun, 2026 01:27 PM

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हाल ही में लेबनान के बेरूत पर इजरायली हमलों के बाद ईरान और इजरायल के बीच अस्थायी युद्धविराम टूट गया है और एक बार फिर सीधा युद्ध भड़क गया है। इसके बाद वहां पर हलात फिर से खराब हो गए हैं। इसे देखते हुए ईरान में भारतीय दूतावास ने भारततीयों के लिए नई...

नेशनल डेस्क: हाल ही में लेबनान के बेरूत पर इजरायली हमलों के बाद ईरान और इजरायल के बीच अस्थायी युद्धविराम टूट गया है और एक बार फिर सीधा युद्ध भड़क गया है। इसके बाद वहां पर हलात फिर से खराब हो गए हैं। इसे देखते हुए ईरान में भारतीय दूतावास ने भारततीयों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। भारतीय दूतावास ने कहा कि क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए, दूतावास सभी भारतीय नागरिकों को अपनी पहले की सलाह दोहराता है कि वे ईरान की यात्रा करने से बचें। जो भारतीय नागरिक अभी ईरान में हैं, उन्हें भी सलाह दी जाती है कि वे उपलब्ध परिवहन साधनों से देश से बाहर निकल जाएं।
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आप को बता दें कि इस बार फिर पूरे पश्चिम एशिया के सामने एक बार फिर युद्ध छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने खबर में बताया कि इस्फहान, करज, तबरीज और तेहरान में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। तेहरान में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि राजधानी के पश्चिमी हिस्से में कम से कम एक बड़े धमाके की आवाज सुनाई दी। इजराइली हमलों के बाद ईरान ने तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इजराइल की सेना ने कहा कि यमन की ओर से एक मिसाइल दागे जाने के बाद सोमवार को देश के कई हिस्सों में सायरन बज उठे। हालांकि, सेना ने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। 

इजराइल की बचाव सेवाओं के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने या कहीं मिसाइल गिरने की कोई सूचना नहीं मिली है। यमन के बड़े हिस्से पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है। इससे पहले भी इजराइल-हमास युद्ध के दौरान और उसके बाद हूती विद्रोहियों ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागी थीं, लेकिन वे ईरान-इजराइल के मौजूदा संघर्ष में पूरी तरह शामिल नहीं हुए हैं। हूतियों ने अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, अतीत में कई बार उन्होंने हमलों की जिम्मेदारी देर से स्वीकार की है। ईरान के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और न ही किसी संभावित नुकसान के बारे में जानकारी दी। 

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