Edited By Parveen Kumar,Updated: 01 Apr, 2026 12:05 AM

हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को कलयुग का सबसे प्रभावशाली और जाग्रत देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है और वे आज भी धरती पर विद्यमान हैं। शास्त्रों में उन्हें भगवान शिव का रुद्रावतार और चिरंजीवी...
नेशनल डेस्क : हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को कलयुग का सबसे प्रभावशाली और जाग्रत देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है और वे आज भी धरती पर विद्यमान हैं। शास्त्रों में उन्हें भगवान शिव का रुद्रावतार और चिरंजीवी बताया गया है, जो हर युग में जीवित रहते हैं।
कलयुग में हनुमान भक्ति का विशेष महत्व
मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और विधि-विधान से बजरंगबली की पूजा करता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि कलयुग में हनुमान जी की उपासना को विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
गंधमादन पर्वत से जुड़ी मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी वर्तमान समय में गंधमादन पर्वत पर निवास कर रहे हैं। यह पर्वत कैलाश पर्वत के उत्तर दिशा में सुमेरू पर्वत के समीप स्थित बताया गया है। मान्यता है कि कैलाश मानसरोवर और बद्रीनाथ धाम के बीच यह दिव्य स्थान मौजूद है, जिसे ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता है। गंधमादन पर्वत का उल्लेख कई पुराणों और बौद्ध साहित्य में भी मिलता है। इसे अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी स्थल माना जाता है, जहां यक्ष, किन्नर और अप्सराओं के निवास की भी मान्यता है।
श्रीराम के आदेश से धरती पर निवास
भागवत पुराण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम बैकुंठ लोक के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब उन्होंने हनुमान जी को पृथ्वी पर ही रहने और अपने भक्तों की रक्षा करने का आदेश दिया था। तभी से यह मान्यता प्रचलित है कि हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर निवास कर रहे हैं।
महाभारत में भी मिलता है उल्लेख
महाभारत में भी गंधमादन पर्वत का जिक्र मिलता है। कथा के अनुसार, इसी स्थान पर हनुमान जी ने पांडव पुत्र भीम का घमंड तोड़ा था। इस घटना को हनुमान जी की शक्ति और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। इन सभी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर गंधमादन पर्वत को एक रहस्यमयी और दिव्य स्थान माना जाता है, जहां हनुमान जी आज भी श्रीराम की भक्ति में लीन हैं। हालांकि, यह आस्था और विश्वास का विषय है, जिसकी पुष्टि वैज्ञानिक रूप से नहीं की गई है।