Edited By Rohini Oberoi,Updated: 09 Feb, 2026 09:10 AM

अंतरिक्ष की दुनिया में भारत एक और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। इसरो (ISRO) ने अपने बेहद महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) मिशन की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह मिशन न केवल चंद्रमा की सतह पर उतरेगा बल्कि वहां की मिट्टी और चट्टानों के...
ISRO Chandrayaan 4 Mission : अंतरिक्ष की दुनिया में भारत एक और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। इसरो (ISRO) ने अपने बेहद महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) मिशन की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह मिशन न केवल चंद्रमा की सतह पर उतरेगा बल्कि वहां की मिट्टी और चट्टानों के नमूने (Lunar Samples) इकट्ठा कर उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस भी लाएगा।
तकनीकी बाधाएं दूर, सफलता का रास्ता साफ
इसरो ने हाल ही में उन खास तकनीकों का सफल परीक्षण किया है जो चंद्रयान-4 के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही थीं। इसमें सबसे अहम है 'रिटर्न मिशन' (Return Mission) की तकनीक—यानी चंद्रमा से वापस उड़ान भरकर पृथ्वी के वायुमंडल में सुरक्षित प्रवेश करना।
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सटीक लैंडिंग: चांद की ऊबड़-खाबड़ सतह पर सही जगह उतरने का टेस्ट।
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सैंपल कलेक्शन: रोबोटिक आर्म के जरिए मिट्टी और पत्थरों को जमा करने की प्रक्रिया।
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वापसी का सफर: सैंपल को एक खास कैप्सूल में रखकर उसे सुरक्षित धरती पर लैंड कराना।
क्यों खास है चंद्रयान-4?
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब भारत का अगला लक्ष्य चांद से उपहार (नमूने) वापस लाना है।
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वैज्ञानिक शोध: चंद्रमा की मिट्टी और खनिजों का धरती की लैब में बारीकी से अध्ययन किया जाएगा जिससे चांद की उत्पत्ति के कई अनसुलझे रहस्य खुल सकते हैं।
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एलीट क्लब में एंट्री: इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों (जैसे अमेरिका, रूस और चीन) की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनके पास चांद से नमूने लाने की तकनीक मौजूद है।
लॉन्च टाइमलाइन: कब उड़ान भरेगा चंद्रयान-4?
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार मिशन की तैयारियों को देखते हुए इसे 2027 तक लॉन्च किए जाने की योजना है। फिलहाल मिशन के डिजाइन और रॉकेट की क्षमता बढ़ाने पर तेजी से काम चल रहा है। यह मिशन न केवल इसरो की तकनीकी आत्मनिर्भरता को साबित करेगा बल्कि भविष्य में मानव मिशन (Gaganyaan) के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।