Edited By Rohini Oberoi,Updated: 29 Jan, 2026 10:52 AM

केरल के बाद अब पश्चिम बंगाल, झारखंड और तमिलनाडु में निपाह वायरस (Nipah Virus) के बढ़ते मामलों ने दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि संक्रमण को सीमाओं के पार जाने से रोकने के लिए एशिया के कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों...
Nipah Virus High Alert : केरल के बाद अब पश्चिम बंगाल, झारखंड और तमिलनाडु में निपाह वायरस (Nipah Virus) के बढ़ते मामलों ने दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि संक्रमण को सीमाओं के पार जाने से रोकने के लिए एशिया के कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग और सख्त जांच शुरू कर दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे भविष्य की महामारी के संभावित खतरों में शामिल किया है। आइए जानते हैं क्या है यह वायरस और कैसे एयरपोर्ट्स पर बरती जा रही है सख्ती।

क्यों डरा रहा है निपाह?
निपाह कोई साधारण वायरस नहीं है यह जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) वायरस है। यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (Fruit Bats) की लार और मल-मूत्र से फैलता है। यह वायरस सीधे मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) पैदा करता है। संक्रमित व्यक्ति मात्र 24 से 48 घंटे के भीतर कोमा में जा सकता है। वर्तमान में इस वायरस के लिए दुनिया में कोई वैक्सीन या ठोस इलाज उपलब्ध नहीं है।

एयरपोर्ट्स पर लागू हुए ये 3 कड़े नियम
भारत से आने वाले यात्रियों के माध्यम से संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे देशों ने ये कदम उठाए हैं:
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थर्मल स्कैनिंग: संदिग्ध क्षेत्रों से आने वाले हर यात्री के शरीर के तापमान की जांच हो रही है। बुखार पाए जाने पर यात्रा पर रोक लगाई जा सकती है।
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आइसोलेशन वार्ड: यदि किसी यात्री में तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या गंभीर सिरदर्द जैसे लक्षण दिखते हैं तो उन्हें तुरंत एयरपोर्ट पर बने विशेष आइसोलेशन सेंटर भेजा जा रहा है।
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हेल्थ डिक्लेरेशन: यात्रियों को अपनी पिछली 'ट्रैवल हिस्ट्री' की सही जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है।

बचाव के लिए क्या करें?
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फल खाने में सावधानी: पेड़ों से गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को बिल्कुल न खाएं।
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खजूर का रस: कच्चे खजूर के रस (ताड़ी) के सेवन से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर रात में इसे दूषित कर देते हैं।
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दूरी बनाएं: बीमार पशुओं और संक्रमित व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आने से बचें।
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मास्क और स्वच्छता: सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें और नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं।