किसे क्या पहनना चाहिए, यह तय करना अदालतों का काम नहीं, हिजाब मामले पर बोले भाजपा नेता

Edited By Updated: 26 Aug, 2026 08:03 PM

it is not for the courts to decide who should wear what said the bjp leader on

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्कूल में हिजाब पहनने को लेकर दिए गए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के दौरान की गई टिप्पणियों की बुधवार को आलोचना की। पार्टी ने कहा कि यह मामला स्कूल प्रशासन पर छोड़ दिया जाना चाहिए और अदालतों का काम यह तय करना नहीं है...

नयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्कूल में हिजाब पहनने को लेकर दिए गए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के दौरान की गई टिप्पणियों की बुधवार को आलोचना की। पार्टी ने कहा कि यह मामला स्कूल प्रशासन पर छोड़ दिया जाना चाहिए और अदालतों का काम यह तय करना नहीं है कि किसे क्या पहनना चाहिए। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने कहा, ''मुझे लगता है कि अगर अदालत इस तरह के आदेश जारी करती है, तो इससे कई जटिल मुद्दे और समस्याएं पैदा होंगी, जिनका असर हर धर्म पर पड़ेगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति देने का स्कूल अधिकारियों को निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली याचिका 21 अगस्त को खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था, ''हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है और एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी।'' अदालत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए इस्लाम ने कहा, ''आप केवल एक धर्म को अलग करके नहीं देख सकते। गांवों में भी महिलाएं 'पर्दा' करती हैं। यह हमारी संस्कृति और सामाजिक शिष्टाचार का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि कोई व्यक्ति अपना निजी जीवन किस तरह जीता है, यह तय करना अदालत का काम नहीं है।'' पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता को छोड़कर किसी अन्य छात्रा ने हिजाब नहीं पहना है, ''यहां तक कि जिस धार्मिक समुदाय से वह आती है, उस समुदाय की छात्राओं ने भी हिजाब नहीं पहना है''। अदालत ने कहा था ''याचिका में यह दावा कि हिजाब पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, केवल एक दावा भर है।'' इस्लाम ने कहा कि अदालत को इस तथ्य का भी संज्ञान लेना चाहिए कि आस्था एक ''बहुत महत्वपूर्ण चीज'' है। 

उन्होंने कहा कि हर धर्म के लोग अपने-अपने धार्मिक विश्वासों में आस्था रखते हैं और उसी के अनुरूप अपना जीवन जीते हैं तथा संविधान सभी को यह अधिकार प्रदान करता है। इस्लाम ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि अदालत को इस बारे में कोई आदेश देना चाहिए कि किस व्यक्ति को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं पहनना चाहिए। धर्म की परवाह किए बिना, हर नागरिक को अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने और पहनावा चुनने का अधिकार है। केवल यह आवश्यक है कि वह देश के कानूनों का उल्लंघन न करे। इसके अलावा, उन्हें पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ''हालांकि, स्कूल एक अलग व्यवस्था है। स्कूलों में वर्दी निर्धारित होती है और क्या पहना जाना चाहिए तथा क्या नहीं, इसका फैसला स्कूल प्रशासन पर छोड़ दिया जाना चाहिए। यह मामला स्कूल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है, अदालतों के नहीं।

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