Jaipur Pink Elephant: रशियन फोटोग्राफर का शौक बना संकट, जयपुर में ‘पिंक हाथी’ की मौत, उठी जांच की मांग

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 10:45 AM

jaipur controversy elephant dies after being painted for photo shoot

जयपुर में हाल ही में एक विदेशी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर द्वारा हाथी और महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगने का मामला अब विवाद का रूप ले चुका है। यह फोटोशूट जयपुर के पास स्थित हाथी गांव में कराया गया था।

नेशनल डेस्क: जयपुर में हाल ही में एक विदेशी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर द्वारा हाथी और महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगने का मामला अब विवाद का रूप ले चुका है। यह फोटोशूट जयपुर के पास स्थित हाथी गांव में कराया गया था। वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट होने के बाद वायरल हो गईं, लेकिन हाथी की बाद में मौत के कारण यह मामला और गंभीर हो गया है।

क्या हुआ घटना में
रूस की रहने वाली इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने जयपुर घूमते हुए आमेर किले के पास 65 साल के हाथी और उस पर बैठी महिला मॉडल यशस्वी को गुलाबी रंग में रंगवाया। इसका उद्देश्य “पिंक सिटी” जयपुर की थीम को दर्शाना था। वीडियो सामने आने पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या जानवर को रंगना सुरक्षित है।


हाथी की मौत और विवाद
करीब डेढ़ महीने पहले उस हाथी की मौत हो गई। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और वन्य जीव प्रेमियों ने आरोप लगाया कि हाथी को रंगने में इस्तेमाल किए गए रंग में केमिकल्स शामिल हो सकते हैं, जिससे उसकी सेहत पर असर पड़ा और मौत हुई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर वन विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में यह पाया गया कि हाथी के साथ क्रूरता की गई है या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


स्थानीय पक्ष की सफाई
हालांकि, हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बबलू खान ने आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि हाथी को केवल कुछ देर के लिए ही रंगा गया था और इसमें किसी हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाथी पहले से ही बुजुर्ग था और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है।


सोशल मीडिया और प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हुआ और जनता में इसे लेकर जमकर बहस हुई। एक ओर पशु अधिकार संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग इसे दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन प्राकृतिक घटना बता रहे हैं। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही इस मामले में सच सामने आएगा और जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह घटना सोशल मीडिया और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी उजागर करती है।

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