जयराम रमेश ने साझा किया 67 साल पुराना माफीनामा, केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 05:35 PM

jairam ramesh shared a 67 year old apology

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को "संस्थानों का असाधारण निर्माता" (Extraordinary Institution Builder) बताया है। उन्होंने नेहरू द्वारा 1959 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस विवियन बोस को लिखा गया एक...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को "संस्थानों का असाधारण निर्माता" (Extraordinary Institution Builder) बताया है। उन्होंने नेहरू द्वारा 1959 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस विवियन बोस को लिखा गया एक ऐतिहासिक 'माफीनामा' सोशल मीडिया पर साझा किया है।

नेहरू ने जज से क्यों मांगी थी माफी?

जयराम रमेश द्वारा साझा किया गया पत्र 26 जून 1959 का है। इस पत्र में पंडित नेहरू ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिस विवियन बोस के खिलाफ की गई अपनी टिप्पणियों पर गहरा खेद व्यक्त किया था। नेहरू ने स्वीकार किया था कि उनके शब्द अनुचित थे और उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था।

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Much gets talked about on the relationship between the executive and the judiciary. Here is an extraordinary letter of apology written by the Prime Minister on June 26 1959 to Justice Vivian Bose - who was a former judge at the Supreme Court.

What a truly extraordinary… pic.twitter.com/Pgj0bHuB9G

— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) February 13, 2026

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नेहरू ने पत्र में लिखा था

"मुझे पूरी तरह अहसास है कि वे टिप्पणियां अनुचित थीं और मुझे खुद को उन्हें बोलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक पूछे गए सवालों और उस वक्त की व्यस्तता के कारण मेरे मुंह से वे शब्द निकल गए।" जयराम रमेश ने इस पत्र के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि नेहरू न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंधों की गरिमा बनाए रखने के लिए कितने प्रतिबद्ध थे।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रोपगैंडा का आरोप

नेहरू की तारीफ के साथ ही जयराम रमेश ने वर्तमान मोदी सरकार पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम India-US Trade Deal को लेकर सरकार के दावों को झूठा प्रचार करार दिया।

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रमेश के मुख्य आरोप

उन्होंने कहा कि यह व्यापारिक समझौता कोई 'कैलिब्रेटेड ओपनिंग' (सोची-समझी शुरुआत) नहीं बल्कि 'कोर्स्ड ओपनिंग' (दबाव में दी गई ढील) है। रमेश ने आरोप लगाया कि भारत को अमेरिका से जो मिला है, उससे कहीं ज्यादा उसे गंवाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की टीम ने प्रधानमंत्री मोदी के उन बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है, जिन्हें सरकारी तंत्र द्वारा प्रचारित किया जा रहा था।

 

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