भारत–ब्रिटेन के बीच बड़ा समझौता: अब विदेश में काम करने पर नहीं देना होगा डबल सोशल सिक्योरिटी टैक्स

Edited By Updated: 10 Feb, 2026 09:29 PM

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भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक अहम और दूरगामी असर वाला समझौता नई दिल्ली में संपन्न हो गया है।

नेशनल डेस्क: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक अहम और दूरगामी असर वाला समझौता नई दिल्ली में संपन्न हो गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस एग्रीमेंट से दोनों देशों में अस्थायी तौर पर काम करने वाले कर्मचारियों और कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें दो देशों में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना पड़ेगा।

इस समझौते पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत में ब्रिटेन की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरून ने हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इसकी आधिकारिक जानकारी साझा की। यह समझौता कर्मचारियों की अंतरराष्ट्रीय तैनाती को आसान बनाएगा और भारत–ब्रिटेन के आर्थिक सहयोग को नई गति देगा।

समझौते से क्या होंगे सीधे फायदे?

नए सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के तहत यदि कोई कर्मचारी या कंपनी अधिकतम 36 महीनों तक अस्थायी असाइनमेंट पर दूसरे देश में काम करती है, तो उसे सिर्फ अपने मूल देश में ही सोशल सिक्योरिटी योगदान देना होगा। इससे डबल पेमेंट की समस्या खत्म हो जाएगी।

इसके अलावा, इस फैसले से स्किल्ड प्रोफेशनल्स, एक्सपैट्स और मल्टीनेशनल कंपनियों की आवाजाही आसान होगी। एम्प्लॉयर्स पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और जॉब क्रिएशन को बढ़ावा मिलेगा।

CETA के साथ होगा लागू

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) के साथ प्रभाव में आएगा। CETA को वर्ष 2025 में अंतिम रूप दिया गया था और इसके 2026 की पहली छमाही में लागू होने की संभावना है। इसके बाद भारत और ब्रिटेन के बीच वर्कफोर्स मूवमेंट और ज्यादा सहज हो जाएगा।

बातचीत की पृष्ठभूमि

इस समझौते को लेकर जनवरी 2026 में नई दिल्ली में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम बातचीत हुई थी। भारतीय पक्ष से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पी.एस. गंगाधर और ब्रिटेन की ओर से नेशनल इंश्योरेंस पॉलिसी के डिप्टी डायरेक्टर एडमंड हेयर इसमें शामिल थे। बातचीत का मुख्य मुद्दा डबल सोशल सिक्योरिटी योगदान से जुड़ी जटिलताओं को खत्म करना था। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह समझौता माइग्रेंट वर्कर्स और प्रोफेशनल्स पर नियमों के बोझ को कम करेगा और दोनों देशों के मजबूत आर्थिक रिश्तों को और गहराई देगा।

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

इस एग्रीमेंट से आईटी, फाइनेंस, इंजीनियरिंग, कंसल्टिंग और सर्विस सेक्टर को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां भारतीय और ब्रिटिश कंपनियां एक-दूसरे के देशों में बड़े पैमाने पर काम कर रही हैं। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल बढ़ेगा और नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।

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