Jan Vishwas Bill 2026: अब 700+ छोटी गलतियों पर नहीं होगी जेल, सिर्फ जुर्माने से होगा निपटारा

Edited By Updated: 04 Apr, 2026 02:32 PM

jan vishwas bill 2026 now there will be no jail for 700 minor mistakes

देश में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। संसद के दोनों सदनों से जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) बिल 2026 पास हो गया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य छोटी-मोटी तकनीकी चूकों को...

नेशनल डेस्क: देश में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। संसद के दोनों सदनों से जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) बिल 2026 पास हो गया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य छोटी-मोटी तकनीकी चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है।

717 प्रावधानों को किया गया 'डिक्रिमिनलाइज'

इस बिल के जरिए कुल 42 अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इनमें से 717 प्रावधानों को डिक्रिमिनलाइज (गैर-अपराधिक) कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब व्यापारिक दस्तावेजों में देरी, लाइसेंस संबंधी छोटी खामियों या अन्य तकनीकी चूकों के लिए जेल की सजा नहीं होगी। इन मामलों को अब केवल आर्थिक दंड (जुर्माना) देकर सुलझाया जा सकेगा।

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आम आदमी को मिलेगी ये राहत

इस कानून का सबसे बड़ा असर रोजमर्रा की सेवाओं पर पड़ेगा:

·         लाइसेंस संबंधी देरी: ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल में देरी या दस्तावेजों की कमी जैसे मामलों में अब कानूनी कार्यवाही के बजाय जुर्माना लगेगा।

·         छोटे उल्लंघन: चक्का जाम या सड़क संबंधी छोटे नियमों के उल्लंघन में अब जेल जाने का डर खत्म हो जाएगा।

·         सुधार का मौका: सरकार का मानना है कि छोटी गलतियों के लिए सख्त सजा देने के बजाय लोगों को सुधारने का अवसर मिलना चाहिए।

हेल्थ और बिजनेस सेक्टर में बड़े बदलाव

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी नियमों को सरल बनाया गया है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और फूड सेफ्टी एक्ट जैसे कानूनों में छोटे उल्लंघनों के लिए अब जेल के बजाय जुर्माने का प्रावधान है। इससे अस्पतालों और फार्मा कंपनियों को अनावश्यक अदालती चक्करों से मुक्ति मिलेगी।

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अदालतों पर घटेगा बोझ

नए सिस्टम के तहत अब इन मामलों की सुनवाई के लिए एक 'एडजुडिकेशन मैकेनिज्म' तैयार किया गया है। अब छोटे विवादों का फैसला अधिकारी स्तर पर ही हो सकेगा, जिससे अदालतों में लंबित करोड़ों केसों का बोझ कम होगा और न्याय प्रक्रिया तेज होगी।

 

 

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