Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी 2026 कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पारण समय और व्रत नियम

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 05:55 PM

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हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी या भीष्म एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना का विशेष महत्व माना गया है।

नेशनल डेस्क: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी या भीष्म एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। साल 2026 में जया एकादशी गुरुवार, 29 जनवरी को मनाई जाएगी। गुरुवार भगवान विष्णु का प्रिय दिन है और ज्योतिष में यह गुरु ग्रह से जुड़ा होता है, इसलिए जब एकादशी गुरुवार को आती है तो इसका पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है।

क्यों खास है गुरुवार की जया एकादशी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस संयोग में किया गया व्रत और पूजा—

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है
  • गुरु ग्रह को मजबूत करता है
  • ज्ञान, सुख-समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन लाता है
  • पापों का नाश और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है
  • इस दिन पीली वस्तुओं का दान करने से गुरु ग्रह विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।

जया एकादशी 2026: तिथि और समय (उदयातिथि अनुसार)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 जनवरी 2026, शाम लगभग 4:35 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी 2026, दोपहर लगभग 1:55 बजे
  • मुख्य व्रत व पूजा दिवस: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)

जया एकादशी 2026 के शुभ पूजा मुहूर्त

पूजा, जप और दान के लिए ये समय अत्यंत शुभ माने गए हैं—

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 से 6:18 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:56 बजे
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 से 3:05 बजे
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:55 से 6:22 बजे

पारण कब करें? 

  • पारण तिथि: 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
  • पारण समय: सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक

द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करना शास्त्रसम्मत माना गया है।

विशेष योग जो व्रत को बनाते हैं और प्रभावशाली

जया एकादशी 2026 के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं—

  • रवि योग
  • रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र
  • भद्रावास योग
  • रात्रि में शिववास योग

इन योगों में किया गया व्रत और पूजा शीघ्र फल प्रदान करता है।

जया एकादशी व्रत और पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें (गंगाजल मिलाकर भी कर सकते हैं)
  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • शुद्ध घी का दीपक जलाएं और तुलसी दल अर्पित करें
  • फल, पंचामृत और मिष्ठान का भोग लगाएं
  • विष्णु सहस्रनाम या सत्यनारायण कथा का पाठ करें
  • पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल, केला या धन का दान करें
  • फलाहार या निर्जला व्रत रखें, तामसिक भोजन से दूर रहें
  • रात्रि जागरण करें और अगले दिन पारण करें

जया एकादशी व्रत का फल

मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने पर सभी प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष का मार्ग खुलता है।

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