Kharmas Date 2026: कब से लगेगा खरमास और क्यों रुक जाते हैं शुभ काम? जानिए कारण

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 08:15 PM

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हिंदू धर्म और ज्योतिष मान्यताओं में खरमास (मलमास) को ऐसा समय माना जाता है जब शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।

Kharmas 2026: हिंदू धर्म और ज्योतिष मान्यताओं में खरमास (मलमास) को ऐसा समय माना जाता है जब शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में ग्रहों की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि नए काम या बड़े निर्णय लेने के लिए समय अनुकूल नहीं रहता।

साल 2026 में खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना या नई संपत्ति खरीदने जैसे कई मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।

खरमास कब और क्यों लगता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है। यह स्थिति साल में दो बार बनती है।

  • पहली बार: दिसंबर-जनवरी के दौरान (धनु संक्रांति)
  • दूसरी बार: मार्च-अप्रैल के दौरान (मीन संक्रांति)

इस वर्ष 15 मार्च को मीन संक्रांति होने के कारण खरमास की शुरुआत मानी जा रही है। मान्यता है कि इस अवधि में सूर्य की स्थिति ऐसी रहती है जिससे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल योग नहीं बनते।

खरमास में किन कार्यों से बचना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय कई शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है, जैसे:

  • विवाह, सगाई और अन्य वैवाहिक संस्कार
  • मुंडन, कर्णवेध और यज्ञोपवीत संस्कार
  • गृह प्रवेश या घर का निर्माण शुरू करना
  • नया व्यापार, वाहन या संपत्ति खरीदना
  • बड़े मांगलिक आयोजन

कहा जाता है कि इस अवधि में किए गए कामों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलती या बाधाएं आ सकती हैं।

खरमास के दौरान क्या करना शुभ माना जाता है?

हालांकि इस समय मांगलिक कार्यों से बचा जाता है, लेकिन धार्मिक गतिविधियों को विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इस दौरान लोग:

  • सूर्य देव की पूजा और मंत्र जाप करते हैं
  • सुबह सूर्य को जल अर्पित करते हैं
  • दान-पुण्य और सेवा कार्य करते हैं
  • सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं

खरमास से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर आकाश में भ्रमण करते हैं। कथा में बताया गया है कि लगातार यात्रा के कारण उनके घोड़े थक गए। तब सूर्य देव ने उन्हें विश्राम देने के लिए कुछ समय के लिए रथ से अलग कर दिया और रथ को आगे बढ़ाने के लिए अन्य पशुओं को जोत दिया। उनकी धीमी गति के कारण उस अवधि को खरमास कहा गया और तब से इस समय को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

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